फर्रुखाबाद। जल शक्ति अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट के लिए बने टैंक खुले छोड़ दिए गए हैं। इनमें बच्चों के गिरने का डर रहता है। शिक्षकों को हर समय बच्चों पर नजर रखनी पड़ती और टैंक की ओर जाने से रोकना पड़ता है।
जल शक्ति अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में बारिश का पानी सहेजने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट के लिए टैंक बनाए गए हैं। यह काम ग्राम पंचायत की ओर से वर्ष 2021 में कराया गया। राजेपुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खाखीन, प्राथमिक विद्यालय गांधी, शमसाबाद क्षेत्र के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय पसियापुर में भी जल संचयन के लिए टैंक बनाए गए थे।
ये टैंक खुले पड़े हैं। इन्हें ढक्कन से ढका नहीं गया। यह स्थिति जिले के कई परिषदीय विद्यालयों की हैं, जहां टैंक खुले पड़े हैं और वह बच्चों के लिए खतरा हैं। प्राथमिक विद्यालय खाखीन के प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार, प्राथमिक विद्यालय गांधी की प्रधानाध्यापिका शैलजा यादव, प्राथमिक विद्यालय पसियापुर के प्रधानाध्यापक अभिषेक ओमर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक आत्म विकास ने बताया कि टैंक खुले होने से खेलते समय बच्चों के गिरने से चोट लगने का डर बना रहता है। टैंकों की ओर से जाने से बच्चों को हर समय रोकना पड़ता है।
प्राथमिक विद्यालय हल्दीखेड़ा में ग्राम पंचायत की ओर से वर्ष 2020 में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाया गया। विभागीय अफसरों ने बोरिंग कराकर गड्ढे को खुला छोड़ दिया। यह गड्ढा कूड़े और गंदगी से भर गया है।
पानी की निकासी के लिए सोख्ता टैंक भी नहीं बनाया गया। इससे रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बेकार पड़ा है। बारिश का पानी जमीन में जाने की बजाय मैदान में जा रहा है। विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अधूरे पड़े रेन हार्वेस्टिंग प्लांट के बारे में कई बार सूचना दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। (संवाद)
जिले में तीन वर्ष पहले शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट का निर्माण खेल के चलते अब तक अधूरा है। इससे जल संचयन का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। कमीशन के खेल में योजनाएं बदलीं, पर काम पूरा नहीं हो सका।
भूगर्भ जलस्तर को सुधारने के लिए शासन ने सभी सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के निर्देश मई 2019 में दिए थे। जनपद में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के लिए 1500 से अधिक परिषदीय स्कूलों की सूची बनाई गई। निर्माण की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग को दी गई। भुगतान ग्राम पंचायतों से होना था।
यहीं से खेल शुरू हो गया। एक भवन के लिए करीब 65 हजार का इस्टीमेट बनाकर करोड़ों का काम दो-तीन चहेते ठेकेदारों को दे दिया गया। काम शुरू होने के बाद यह खेल सुर्खियों में आया तो अधूरे कार्य मनरेगा से पूरा कराने के लिए इस्टीमेट 65 हजार की बजाय करीब 99 हजार रुपये का हो गया।
इस खेल की भी पोल खुलने से तीन वर्ष बीतने के बावजूद यह प्लांट अधूरे पड़े हैं। अब फिर इनका काम पूरा कराने की कवायद शुरू की गई है। सीडीओ एम. अरून्मोली ने बताया कि अभी तक 82 सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट का निर्माण पूरा हो चुका है। कुछ भवनों में काम चल रहा हैै।
प्राथमिक विद्यालय खाखिन में खुला पड़ा टैंक। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD