फर्रुखाबाद। जिले से आलू निर्यात की संभावनाएं सिफर हैं। सूबे की सरकार ने इस सीजन में निर्यात के लिए अभी तक निर्यातकों से बैठक भी नहीं की। जिले से आखिरी बार 2009 में नेपाल आलू का निर्यात हुआ था।
इस साल भी आलू किसानों को झटका लगा है। आलू के भाव 450 रुपये क्विंटल के करीब हैं। इस रेट में किसानों को करीब डेढ़ हजार रुपये बीघा का नुकसान है। आलू का निर्यात किसानों को घाटे से बचा सकता है। इस बार भी करीब 36 हजार हेक्टेयर में आलू की बुवाई की गई। उत्पादन 11 लाख मीट्रिक टन होने के आसार हैं।
निर्यात की संभावनाएं सिफर हैं। सूबे की सरकार ने अभी तक निर्यातकों के साथ बैठक भी नहीं की है। इससे निर्यातक मसौदा ही नहीं बना सके हैं। जिले से 2009 में नेपाल को 22 हजार मीट्रिक टन आलू का निर्यात किया गया था। इसके बाद से निर्यात बंद है।
इंडियन पोटैटो ग्रोवर एंड एक्सपोर्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर शुक्ला कहते हैं कि सरकार आलू निर्यात को बढ़ावा नहीं दे रही है। नेपाल, हालैंड, श्रीलंका में आलू निर्यात की संभावनाएं हैं। निर्यातकों को जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिल रहीं। इस बार निर्यातक ों के साथ बैठक भी नहीं हो पाई है। आलू बेल्ट कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, आगरा को निर्यात जोन बना देना चाहिए। तभी किसानों को आलू के ठीक भाव मिलेंगे।