फर्रुखाबाद। सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर से पटलों के बंटवारे का आदेश जारी कर दिया गया। 26 मई का यह आदेश मंगलवार को जारी हुआ और इसी दिन सीएमओ सेवानिवृत्त हो गए। फर्जी आदेश सामने आने के बाद से विभाग में पटलों के प्रभार को लेकर खींचतान मच गई।
एसीएमओ और डिप्टी सीएमओ पटलों के प्रभार पर अपना अधिकार बताकर आसने-सामने हैं। हालंकि, सीएमओ ने खुद आदेश को फर्जी बताया है और इसकी जांच कराकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश चंद्रा मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर शिकंजा कसने के लिए 18 मई को आदेश जारी किया था।
इसमें निजी अस्पतालों व स्वास्थ्य इकाइयों के पंजीकरण की जिम्मेदारी डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा को देकर उन्हें नोडल अधिकारी बनाया था। एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव को झोलाछाप उन्मूलन व एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नोडल अधिकारी नामित किया था।
इससे पहले तीनों पटल डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा देख रहे थे। 18 मई को पटलों के बंटवारे के बाद से ही सीएमओ कार्यालय में खींचतान शुरू हो गई। मंगलवार सीएमओ के सेवानिवृत्त होने के दिन डिस्पैच पटल से एक संशोधित आदेश जारी हुआ।
इसमें डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा को निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी आदि के पंजीकरण व झोलाछाप पटल का नोडल अधिकारी बनाया गया है। आदेश पर तारीख 26 मई दर्ज है और इस पर सीएमओ के हस्ताक्षर बदले हुए हैं।
इस आदेश को सीएमओ ने फर्जी बताया है और कहा है कि उन्होंने पटल संबंधी कोई भी संशोधित आदेश जारी नहीं किया है। उधर, यह आदेश विभाग में चर्चा का विषय ही नहीं बना, बल्कि कई सवाल भी उठा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है फर्जी आदेश बनाना अति गंभीर मामला है।
18 से 26 मई तक जारी हुए 20 आदेश, उठे सवाल
18 से 26 मई तक सीएमओ के हस्ताक्षर से 20 आदेश जारी हुए हैं। इसमें कई आदेश लाखों के भुगतान के भी हैं। इस बीच सीएमओ अस्वस्थ भी रहे। ऐसे में 18 मई और इसके बाद जारी आदेशों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभाग में चर्चा है कि जब सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर जारी करके एक आदेश जारी हो सकता है तो फिर लाखों के भुगतान से जुड़े आदेश भी जारी हो सकते हैं। इससे पहले भी ऐसा किया गया हो।
आखिर आदेश पर डिस्पैच नंबर किसने दिया, यह भी सवाल है। मामला बेहद गंभीर है। इसकी गंभीरता से जांच कराकर दोषी पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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हस्ताक्षर पर फर्जी, हो एफआईआर
- सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया 26 मई के आदेश पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और फर्जी तरीके से किसी ने बनाए हैं। अब वह सेवानिवृत्त हो गए हैं। मामला काफी गंभीर है। जो भी सीएमओ आएगा, उसे जांच करानी चाहिए और एफआईआर भी करानी चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि 18 मई को उनके द्वारा जारी आदेश ही मान्य है।
26 मई के आदेश की जानकारी नहीं
- डॉक्टरों का पटल देख रहे सीएमओ के स्टेनो सतवीर सिंह ने बताया कि 18 मई को जारी आदेश उन्होंने ही टाइप कर सीएमओ से हस्ताक्षर कराए थे। 26 मई के आदेश के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी निष्ठा श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग में जारी होने वाले सभी आदेश उनके पटल से होकर जाते हैं, जिन्हें वह गंभीरता से देखती भी हैं। 26 मई को जारी आदेश उनके पटल तक नहीं पहुंचा और न ही उन्हें जानकारी है।
एसीएमओ बोले, आदेश फर्जी, पटल प्रभारी हम
- 18 मई के आदेश में झोलाछाप उन्मूलन के नोडल अधिकारी बनाए गए एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने कहा कि 26 मई का आदेश पूर्णत: फर्जी है। झोलाछाप का पटल उनके पास है और रहेगा। दूसरी ओर डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा का कहना है कि 26 मई का संशोधन आदेश बिल्कुल सही है। पंजीकरण व झोलाछाप दोनों पटलों की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।