फर्रूखाबाद/अमृतपुर। पांचालघाट स्थित मेला रामनगरिया भक्ति, साधना, सत्संग व दान-पुण्य का संगम है। भोर होते ही कल्पवासी व साधु संत हर हर गंगे का उद्घोष करते हुए स्नान व दान-पुण्य कर रहे है। घंटों साधना व सतसंग कर समय बिता रहे हैं।
मेला रामनगरिया इन दिनों भक्ति भाव से ओतप्रोत है। कल्पवासी, साधु संत अपनी कुटिया में साधना करने में जुटे हैं। जबकि बुजुर्ग कल्पवासी संतों के पंडालों में घंटों सतसंग कर रहे हैं। गंगा तट पर चारों भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है। माघ का महीना समापन की बढ़ रहा है। इससे दान-पुण्य करने की होड़ भी बढ़ती जा रही है। गंगा तट भजन-कीर्तन, कथा भागवत के स्वर गूंज रहे हैं।
मौसम सही होने से मेला में भीड़ हो रही है। हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, इटावा, मैनपुरी, ओरैया, आदि जिले से लोग ट्रैक्टर ट्राॅली, अन्य वाहनों से मेला देखने व गंगा स्नान करने के लिए पांचालघाट पहुंच रहे हैं। इससे मनोरंजन क्षेत्र व मेला बाजार में भीड़ बढ़ रही है। नागा त्यागी साधु कठिन तपस्या करने में लीन हैं।
बाबा बालक दास के खालसा में संत धूनी ताप रहे हैं। चारों ओर आग जलाकर भगवान को मनाने के लिए घंटों तप कर रहे है। शाम को आरती व दीपदान से मां गंगा का आंचल जगमगा उठता है। श्रद्धालु गंगा स्नान करने के बाद यज्ञशाला की परिक्रमा लगाकर देवी माता रानी से मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना कर रहे हैं। कुशवाह क्षेत्र से जूना अखाड़ा के अध्यक्ष सत्य गिरी महाराज की अध्यक्षता में शोभायात्रा निकाली गई। परिक्रमा रास्ते से होते हुए अपने क्षेत्र में पहुंचकर शोभा यात्रा का समापन हुआ।
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भोजपुरी गीतों से लोगों को खूब हंसाया
सांस्कृतिक पंडाल में सुरेश कुशवाह ने अवधी, भोजपुरी व लोक गायन नृत्य से रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने फर्रुखाबाद का सम्मान हर दम बना रहे, आलू का नाम हरदम बना रहे। रेलिया बैरिन पिया को लिए जा रे, आदि गीत सुनाकर लोगों को हंसाया। अन्य कलाकारों ने नृत्य व लोक गीत सुनाकर वाहवाही लूटी।
ईश्वर के संविधान को मानने वाला ही भगवान को पाता: आचार्य चन्द्रदेव
वैदिक क्षेत्र के चरित्र निर्माण शिविर में यज्ञ किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि वेद ईश्वर की वाणी है। परमात्मा ने मनुष्यमात्र के कल्याण के लिए चार ऋषियों के अंतकरण में वेदों का ज्ञान दिया। वेद ईश्वर का संविधान है। ईश्वरीय संविधान वेद की आज्ञा का पालन करने वाला मनुष्य भगवान की कृपा को प्राप्त करता है। आचार्य प्रदीप शास्त्री ने कहा कि ईश्वर का सही स्वरूप हमें वेदों से ही मिलता है। इसलिए वेदों को पढ़ना और सुनना चाहिए। धर्मवीर आर्य, पं. धनीराम बेधड़क, पं. शिवनारायण आर्य ने वेद व ईश्वर महिमा के भजनों से वेद के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। मंगलम आर्य, डॉ. सत्यम आर्य, उदयराज आर्य, संदीप आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य, रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार, उदिता आर्या, अमृता आर्या रहे।