फर्रुखाबाद। गंगा तट पर लगे मेला रामनगरिया में अनगिनत समस्याओं का समाधान न होने पर बुधवार को अखिल भारतीय षड दर्शन नागा सन्यासी संत समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में चार लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
गंगा में गिर रहे नाले को बंद करवाने के लिए षड दर्शन संत समिति के अध्यक्ष महंत सोमवारपुरी के नेतृत्व में चार लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आमरण अनशन पर बैठने वालों में दयालु महाराज, मीरापुरी और महेंद्रानंद हैं। वहीं, क्रमिक अनशन पर रहने वालों में स्वाती अच्युतानंद, ब्रह्म चैतन्य गिरी, ज्ञानार्थी, दिनेश मिश्रा, विभू, सुशील स्वरूप ब्रह्मचारी, लखन स्वरूप और अभिषेक त्रिवेदी हैं।
महंत सोमवारपुरी के नेतृत्व में अनशन पर बैठे नागा संतों तथा अन्य ने मांग की कि गंगा में गिरने वाला गंदा नाला स्थायी रूप से बंद किया जाए। संत, महात्माओं से वाहन कर न वसूला जाए, मेले में लगे नल शीघ्र शुरू कराए जाएं और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए।
संतों ने आरोप लगाया कि कुछ संतों के साथ यहां भेदभाव किया जा रहा है। उसे तुरंत बंद कराया जाए। पालिका के अधिशासी अधिकारी तथा अध्यक्ष के खिलाफ गंगा में गंदगी का मुकदमा दर्ज कराया जाए।
इस मौके पर गंगा समग्र अभियान के संयोजक दिनेश मिश्रा, अभिषेक त्रिवेदी, ज्ञानार्थी, ब्रह्म चैतन्य गिरि, हरिनाम गिरि और महंत दयालु महाराज, सुखदेवा आश्रम, शिवबालक, शिवपूजन, अंजनी गिरी, भाजयुमो नगर अध्यक्ष संजू शर्मा, हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष राघवदत्त मिश्रा, अतुल दीक्षित, गंगा महासभा के रामानंद कटियार आदि रहे।
तहसीलदार की बात नहीं मानी
फर्रुखाबाद। संतों के आंदोलन को देखते हुए तहसीलदार आरपी चौधरी मौके पर पहुंचे और उन्होंने चार-पांच लोगों को ले जाकर नाला दिखवाया। संत तहसीलदार की बात से संतुष्ट नहीं हुए और कहा कि जब तक नाला बंद नहीं हो जाएगा, तब तक वह अनशन नहीं तोड़ेंगे।
जवाबी अनशन पर बैठे जूना अखाड़े के संत
फर्रुखाबाद। अमैयापुर क्षेत्र में कल्पवास कर रहे जूना अखाड़े के महंत पचास संतों को लेकर कुर्सी डालकर नागा संतों के चल रहे अनशन के सामने बैठ गए हैं। उनका कहना है कि षडदर्शन नागा सन्यासी संत समिति संतों को विभाजित कर रही है। जूना अखाड़े के महंत सत्यगिरि का कहना है कि मेले में नागा सन्यासी, बैरागी, दंडी समिति के लोग कल्पवास करने आते हैं। इनके अलग-अलग अध्यक्ष होते हैं। यह षडदर्शन समिति बनाकर संतों को विभाजित कर रहे हैं। इसके निराकरण के लिए वह इस समिति के विरोध में अनशन पर बैठे हैं। इस मौके पर हनुमान गिरि, बाल गिरि, फक्कड़पुरी, सरवन गिरि, देवानंद, मंशा गिरि, मकरंद भारती, दयापुरी आदि संत जवाबी अनशन पर कुर्सी डाले डटे रहे। इन संतों ने मांग की कि गंगा के पश्चिम में बंधे के उत्तरी ओर पर घाट बनाए जाएं तथा यहां के अवैध कब्जेदारों के कब्जे हटाया जाए।