फर्रुखाबाद। परिवहन विभाग अब स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नियमों को सख्त करने जा रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट में फेल होने वाले आवेदकों को 300 रुपये देकर सात दिन में दोबारा टेस्ट देने की पुरानी व्यवस्था खत्म होगी। इसके बजाय, उन्हें 6000 रुपये जमा कर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर में 28 दिन का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
सरकार अप्रशिक्षित लोगों के वाहन चलाने से बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर चिंतित है। इसी चिंता के चलते एआरटीओ स्तर से यह नई व्यवस्था शीघ्र ही शुरू की जाएगी। अभी तक बाइक, एलएमवी और हैवी लाइसेंस के लिए कार्यालय स्तर पर ही औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती थीं। एलएमवी लाइसेंस टेस्ट में फेल होने पर सात दिन बाद 300 रुपये की रसीद कटवाकर दोबारा टेस्ट दिया जा सकता था। विभाग स्तर पर इन टेस्टों में अक्सर खानापूरी की जाती रही है, जिसका असर बढ़ती दुर्घटनाओं में साफ दिखता है। सरकार ने एक अगस्त से ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर पर टेस्ट देना अनिवार्य कर दिया है। फिलहाल, टेस्ट में फेल होने वाले आवेदक पुरानी व्यवस्था में ही दोबारा टेस्ट दे रहे हैं।
ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक उदय दुबे ने बताया कि नई नियमावली बन चुकी है। फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही चल रही है, लेकिन एनआईसी स्तर पर सॉफ्टवेयर में बदलाव होने हैं। आवेदक लगातार तीन बार टेस्ट में फेल होगा, तो उसे बिना 28 दिन के प्रशिक्षण के फार्म-5बी नहीं मिल सकेगा। यह नई व्यवस्था एलएमवी (फोर व्हीलर) और हैवी दोनों तरह के लाइसेंस पर लागू होगी।
सड़क सुरक्षा में सुधार की उम्मीद
इस कदम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है। अप्रशिक्षित चालकों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। नई व्यवस्था से चालकों को उचित प्रशिक्षण मिलेगा। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार आने की उम्मीद है। यह पहल सुरक्षित ड्राइविंग आदतों को बढ़ावा देगी।