पारा लगातार ताव खा रहा है। मानसून की हाल फिलहाल उम्मीद नहीं लग रही है।
दोपहर को यूं लगता है कि आसमान से आग बरस रही है। बिजली के नखरे कायम हैं।
बिजली आती है और मुंह दिखाकर विदा ले लेती है। कूलर और पंखों के विंग पूरे
चक्कर ले ही पाते हैं कि बिजली गायब। लोग पसीना-पसीना। आलम यह है कि पानी
की बोतल साथ लेकर न चलो तो एक किलोमीटर भी चलना दुश्वार। सड़काें के किनारे
के पेड़-पौधों को लोगों ने लील लिया। हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं।
गर्मी
इन दिनों सोशल मीडिया के लिए भी खास मुद्दा बनी हुई है। गर्मी से बढ़ी
मुश्कि ल को यूजर सोशल मीडिया पर भी खूब बयां कर रहे हैं। सोशल साइट फेसबुक
पर गर्मी इन दिनों खास विषय है। पारा से जुड़े ऐसे स्टेटस पर यूजर लाइक के
साथ ही कमेंट भी कर रहे हैं। 10 में से 3 एकाउंट पर लोगों में गर्मी से
बेचैनी दिख रही है। जिले में बड़ी संख्या में लोगों केे फेसबुक पर एकाउंट
हैं। इनके स्टेटस चढ़े पारा की शिद्दत बताने के साथ बेहाली को भी जाहिर कर
देते हैं।
शहर से लेकर कसबों और देहात में लोग चढ़े पारे से बेहाल
हैं। पारा 43 और 44 डिग्री सेल्सियस के इर्दगिर्द घूम रहा है। ऐसे में लोग
जरूरी कामों से ही बाहर निकल रहे हैं। वह भी पूरे बंदोबस्त के साथ। शहर में
पैक और आरओ के पानी की खपत तीन गुना बढ़ गई है। सवारियों की आवाजाही कम
हुई है। आम मौसम में रोज 150 के करीब रु पये कमाने वाले रिक्शा
चालक 50 से
60 रुपये क ी कमाई कर पा रहे हैं। निर्माण के काम 20 से 30 फीसदी हो रहे
हैं। मजदूरी को झटका लगने से रोजी रोटी पर भी संकट है। पेयजल का संकट बना
ही हुआ है। हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। रीबोर के लिए बजट है नहीं। बिजली
कटौती से सिंचाई का भी संकट है। इन्हीं पर स्टिल और विजुअल स्टेटस डाले जा
रहे हैं।
सोशल मीडिया
चढ़े पारा से रसोई के खर्च में कटौती। खुले आसमान के नीचे कुकर रख कर सब्जी पका लो।
विवेक, आवास विकास
मन की बात: ऐसी गर्मी में फ्रिज में सोने का मन करता है।
रामेंद्र कुमार, कायमगंज
सर्दी में शीत से बचाव के लिए शरणालय बनाए जाते हैं। गर्मी से राहत के लिए बर्फालय बनवाए जाएं।
शीतल, बजरिया