फर्रुखाबाद। यूरो की मंदी से टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार को झटका लगा है। 20 से 25 फीसदी निर्यात प्रभावित हुआ है। शहर में सालाना 180 करोड़ रुपये का कारोबार है। यहां छपे वस्त्र 15 मुल्कों में निर्यात होते हैं।
शहर में साड़ी, हैंडमेेड रजाई, परदे, स्टोल का बड़ा कारोबार है। शहर में छोटी बड़ी 125 इकाइयां इस कारोबार में लगी हैं। साउथ अफ्रीका, यूरोप और अरब देशों में निर्यात होता है। यहां के बने टेक्सटाइल प्रिंट आइटमों का यूरोप के देशों में बड़ी मांग है। 40 फीसदी के करीब निर्यात इन्हीं देशों में हैं।
इन देशों की मुद्रा यूरो पर मंदी है। यूरो का मूल्य 60 से 72 के करीब है। कारोबारियों को लागत के हिसाब से दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे निर्यात में गिरावट आई है। कारोबारियों ने उत्पादन पर भी इसी दर से कम कर दिया है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के रोहित गोयल का कहना है कि यूरो की मंदी का सीधा असर टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार पर हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूरो पर मंदी है। इससे निर्यात पर 25 फीसदी तक असर है। निर्यातक बाजार पर निगाह रखे हैं। यूरो में सुधार के बाद निर्यात फिर से पुरानी रफ्तार पर आ जाएगा।
टेक्सटाइल पार्क की डीसीआर पर सहमति
टेक्सटाइल पार्क के लिए एक बड़ी बाधा पार हो गई है। केंद्र सरकार ने रिवाइज डीसीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर सहमति दे दी है। इस महीने के अंतिम सप्ताह में इस प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली में केंद्र व राज्य सरकार के तकनीकी अधिकारियों की बैठक होनी है। फरवरी 2015 में सूबे की सरकार ने कैबिनेट में सकवाई में टेक्सटाइल पार्क के लिए मसौदा पास किया था। सरकार ने डीपीआर केंद्र सरकार के पास भेज दी थी।
केंद्र सरकार ने इस पर असहमति जताकर रिवाइज डीपीआर मांग ली। 30 नवंबर को दिल्ली में वस्त्र मंत्रालय की बैठक में रिवाइज डीपीआर पर सहमति बन गई। रिवाइज डीपीआर 120 करोड़ रुपये की है। पार्क में केंद्र व राज्य सरकार का भी पैसा लगेगा। आईआईए के चेप्टर चेयरमैन रोहित गोयल ने बताया कि इस माह के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में केंद्र व राज्य सरकार के तकनीकी अधिकारियों क ी बैठक में बाकी के मसौदों को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।