सदर विधायक की निधि से दो वर्ष पूर्व शहर व निकटवर्ती गांव में एक करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए आरओ आज भी लोगों का प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। प्लांट राहगीरों का गला नहीं सींच पा रहे हैं।
इनकी सूखी टोटियां प्यासे राहगीरों का मुंह चिढ़ा रही हैं। पहली जांच में घटिया सामग्री की पुष्टि होने के बाद दोबारा जांच कराई गई। फिलहाल अब कार्यदायी संस्था को क्लीनचिट देने की तैयारी चल रही है। इससे लटका हुआ भुगतान भी वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले कर दिया जाए।
गर्मी में राहगीरों को ठंडा पानी मिल सके, इसके लिए सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने वर्ष 2018-19 में अपनी निधि से 22 आरओ प्लांट लगवाए थे। करीब चार लाख 35 हजार रुपये की लागत से आरओ प्लांट लगाने को कार्यदायी संस्था यूपीएसआईसी (लघु उद्योग निगम) को जिम्मेदारी दी गई और 50 लाख रुपये भुगतान भी दे दिया गया।
शेष भुगतान काम पूरा होने के बाद करने की शर्त थी। कार्यदायी संस्था की मनमानी के चलते इनमें घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और चालू होने से पहले टोटी, पाइप आदि सामग्री टूटने लगी। शिकायत पर अधिकारियों ने निरीक्षण किया। इसके बाद पांच सदस्यीय समिति गठित कर तकनीकी जांच कराई गई।
इसमें घटिया सामग्री लगाए जाने की पुष्टि होने पर पर कार्यदायी संस्था को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस भेज दिया गया। इसके बाद कार्यदायी संस्था की आपत्ति पर दोबारा जांच हुई तो लीपापोती शुरू हो गई।
आखिरकार आरओ प्लांट की गुणवत्तापूर्ण पाए जाने पर प्रशासनिक जांच परियोजना निदेशक डीआरडीए को सौंप दी गई। बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था को भुगतान के लिए क्लीनचिट देने की तैयारी है। जबकि गर्मी के दस्तक देने के बावजूद कुछ एक को छोड़कर अधिकांश आरओ प्लांट चालू होना तो दूर बिजली के कनेक्शन तक नहीं हुए।
शहर के तहसील परिसर, रेलवे रोड मठिया देवी मंदिर, वाल्मीक मंदिर, पंडाबाग मंदिर, लाल दरवाजा, मोहल्ला नरकसा स्थित अस्पताल के निकट, घुमना बाजार, कांशीराम कालोनी, लिंजीगंज बाजार, बढ़पुर देवी मंदिर, पुलिस लाइन, गरैयाखारे मंदिर, याकूतगंज आदि स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए गए। जसममई में रायपुर चौकी के निकट लगे आरओ प्लांट की जाली के अंदर लोग कब्जा कर निजी सामान रखे हुए हैं। बंद पड़े इस प्लांट की जाली आदि पर जंग लगने से कबाड़ हो रहे हैं।
डीआरडीए के पीडी राजमणि वर्मा ने बताया कि प्रशासनिक जांच उन्हें सौंपी गई है। अभी 5-6 आरओ प्लांट ही वह देख सके हैं। फिलहाल कोई कमी नहीं मिली। शीघ्र ही जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी। आरओ प्लांट में गुणवत्तापूर्ण सामग्री की पुष्टि होने के बाद ही कार्यदायी संस्था को भुगतान किया जाएगा।