शमसाबाद। बाढ़ क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक में गंगा के कटान का कहर लगातार जारी है। रविवार शाम चार ग्रामीणों के मकानों का कुछ हिस्सा टूटकर गंगा में समा गया। इससे लोगों में दहशत का माहौल है।
गांव के लालजीत, शिवराज, योगराज और रामतीर्थ के मकानों के कुछ हिस्से पहले से ही गंगा कटान की जद में थे। खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने स्तर से मकानों का कुछ हिस्सा तोड़कर सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया था। इसके बावजूद मकानों के जो हिस्से बचे थे, वे रविवार शाम तेज कटान के चलते टूटकर गंगा में गिर गए।
गांव निवासी मनोज और हार्नेस के मकान भी लगातार गंगा की कटान की जद में बने हुए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो उनके मकान भी गंगा में समा सकते हैं।
समैचीपुर में भी कटान तेजी से होने से ग्रामीण अपने मकान खाली करने में लगे हुए हैं। साथ ही सुरक्षित स्थान खोज कर अपना आशियाना बसाने में लगे हैं।
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बहबलपुर-धीमर नगला मार्ग पर बह रहा पानी
कंपिल। गांव धीमर नगला और अहिवरन नगला में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी घुस गया है। करीब 15 घरों के अंदर और आसपास पानी भरने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों में मानसिंह कश्यप, राय सिंह कश्यप, बदलू, रामबरन, चंद्रपाल, नेत्रपाल, राधेश्याम, रामौतार, रामसरन, हरवीर, जबरसिंह, किशनपाल, ख्यालीराम और सुधीश शामिल हैं।
बहबलपुर से धीमर नगला को जोड़ने वाले पुल पर करीब एक फीट पानी बह रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पुल से आवागमन कर रहे हैं। इससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
लेखपाल विवेक सिंह ने बताया कि कंपिल में बाढ़ राहत शरणालय की व्यवस्था है। जलस्तर और बढ़ने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा।