नगर को खुले में शौच से मुक्त करने के लिये स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बनवाए गए सात शौचालय बने हैं। इसमें से तहसील के सामने पिंक शौचालय के बाहर कब्जा हो गया है। इसके अलावा कहीं हाथ ठेला वाले तो कहीं लोगों ने अपनी दुकानें सजाकर अतिक्रमण कर लिया है।
ऐसे में यहां आने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन पालिका प्रशासन को इससे कोई वास्ता नहीं है। कई बार शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है।
लोगों की सुविधा के लिए पालिका प्रशासन ने नगर में अलग-अलग स्थानों पर चार सामुदायिक शौचालय, दो पब्लिक टॉयलेट बनवाए, एक शौचालय बनवाने में करीब 8 लाख रुपये की लागत आई है।
तहसील के सामने एक पिंक शौचालय बनवाया गया। यह शौचालय महिलाओं की सुविधा के लिए है। इसमें करीब 3 लाख 92 हजार रुपये की लागत आई थी। यह शौचालय तहसील व अस्पताल, मुंसिफ कोर्ट के करीब है। हजारों महिलाएं इन विभागों में आती हैं। पिंक शौचालय के बाहर रोज सुबह ही सब्जी विक्रेता व पान मसाला बेचने का ठेला आकर लग जाता है। हालांकि पहले भी यहां ये दुकानें सजती थीं।
अब ये ठेले वाले जाएं तो कहां जाएं, इसलिए यह दुकानें आज भी सज रहीं हैं। ऐसे में पिंक शौचालय को इस्तेमाल के लिए आने वाली महिलाएं संकोच करती हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल न के बराबर हो रहा है। इस मामले में ईओ सीमा तोमर से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन आऊट आफ रेंज था। नगर पालिका चेयरमैन सुनील चक ने बताया शौचालयों का निर्माण लोगों की सुविधा के लिए कराया गया है। यहां ऐसा कोई अतिक्रमण है तो उसे जल्द ही हटवाया जाएगा।