केंद्र सरकार बिजली प्राइवेट कंपनी के हाथों में देने की तैयारी कर रही है। इसका विद्युत निगम के संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
अधिकारी और कर्मचारियों ने हाथों में काली पट्टी बांध कर सोमवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और निजीकरण का विरोध किया।
केंद्र सरकार ने कोरोना काल में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का मसौदा तैयार कर 17 अप्रैल को जारी कर दिया। इसके तहत बिजली व्यवस्था निजी कंपनी के हाथों में दी जाएगी।
इसका विरोध निगम के अधिकारी व कर्मचारियों ने शुरू कर दिया है। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को निगम के अफसरों व कर्मचारियों ने प्रांतीय आह्वान पर हाथों में काली पट्टी बांध कर अधीक्षण अभियंता कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
संयोजक एसडीओ जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने निजीकरण को जो मसौदा तैयार किया है। उसको मानसून सत्र जुलाई में संसद में पास कराने की तैयारी कर रही है। इसके पास होने से बिजली का नया काननू आ जाएगा। जो बिजली अभी कम दर में मिल रही है।
वह निजीकरण होने पर करीब आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी। किसानों को अभी एक साल में जो बिल देना पड़ता है। निजीकरण के बाद दस गुना देना होगा। संगठन ने केंद्र सरकार से निजीकरण के निर्णय को वापस लेेने की मांग की है।
इस दौरान सह संयोजक सतेंद्र सिंह, अमित मिश्रा, रंजीत मौर्या, अजीत कुमार, राकेश कुमार, एसबी सिंह, अजय सिंह, राघवराम पांडेय समेत अवर अभियंता व कर्मचारी मौजूद रहे।