मंगलवार से शुरू हो सकता है पहला रोजा
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ईद-उल-फितर के त्योहार को लेकर बाजार में इंडोनेशिया और सऊदी अरब की टोपियां लोगों को खूब भा रही हैं। तुर्की की जानमाज लोगों की पहली पसंद बनी है। इसके साथ ही लोग कुरान और इत्र की भी जमकर खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि जरदोजी पर छाई मंदी से इस बार बिक्री में 20 से 30 प्रतिशत कमी आई है। वहीं टोपी, जानमाज और कुरान आदि के दाम बढ़े हैं।
ईद-उल-फितर फित्र में महज एक या दो दिन बचे हैं। इसको लेकर मुस्लिम समाज में गजब का उत्साह दिखाई दे रहा है। इंडोनेशिया, ताइवान, चाइनीज, सऊदी अरब, तुर्की, इंडियन और प्लास्टिक की विभिन्न प्रकार की टोपियों का स्टाक दुकानदारों ने कर रखा है। तुर्की की जानमाज और सऊदी अरब तथा कन्नौज का इत्र की भी डिमांड है। घुमना बाजार तिराहा, पक्कापुल, घोड़ा नखास और कोतवाली रोड फतेहगढ़ आदि बाजारों में दुकानदारों ने विभिन्न वैरायटियों की टोपियां, जानमाज और इत्र का स्टाक कर रखा है। मस्जिदों में रखने के लिए प्लास्टिक की टोपियों की डिमांड है। तुर्की की जानमाज भी लोगों को खूब भा रही है।
हालांकि दुकानदारों का कहना है कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा बिक्री में करीब 20 से 30 प्रतिशत गिरावट आई है। घुमना तिराहे पर टोपी की दुकान लगाए मोहम्मद यासीन शमसी ने बताया कि इस साल ईद के त्योहार पर मंदी है। इसका कारण जरदोजी पर छाई भीषण मंदी है। अधिकतर मुस्लिम जरदोजी पर ही निर्भर थे लेकिन जरदोजी पर छाई मंदी से कारीगर दूसरे कामों में लग गए। दूसरे कामों में पैसा कम मिलने से लोगों के सामने समस्या है।
यासीन कहते हैं कि दिल्ली से टोपी, कुरान और जानमाज आदि लेकर आते हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार टोपी, जानमाज और इत्र आदि के दानों में आठ से दस प्रतिशत महंगाई बढ़ी है। अब तीन दिन त्योहार के शेष बचे हैं। इन्हीं दिनों में बिक्री बढ़ना शुरू हुई है। इस बार मुनाफा कम होगा।