फर्रुखाबाद। बदलते मौसम और ठंडी चीजे खाने से लोगों के गले में दिक्कतें बढ़ी हैं।
पानी पीने और खाना निगलने में हो रही दिक्कत गंभीर भी हो सकती है। इसे नजर अंदाज न करें। यदि ऐसी दिक्कत हो तो फौरन चिकित्सक को दिखाएं। चिकित्सक इसे लेरिन्जाइटिस रोग बता रहे हैं। होली के बाद से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
मार्च महीने में लगातार मौसम में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। 35 डिग्री से लेकर 28 डिग्री तक तापमान इस महीने रह चुका है। ऐसे में लोग गर्मी से निजात पाने के लिए ठंडी वस्तुओं का सेवन कर रहे हैं। सुबह शाम ठंडक और दोपहर में गर्मी रहने से लोग ठंडी-गर्म चीजे खाने से बच नहीं पा रहे हैं। रही सही कसर होली के दौरान पूरी हो गई। होली के बाद से खुली लोहिया जिला अस्पताल की ओपीडी में काफी संख्या में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
अस्पताल के ईएनटी चिकित्सक डॉ. नवनीत कुमार बताते हैं कि लेरिन्जाइटिस बीमारी ज्यादातर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि मौसम बदल रहा है। ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर के खाने से परहेज करें। गले में दिक्कतें बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना ने बताया कि रात में ठंडी चीज खाने से बच्चों के गले में खराश की समस्या बढ़ जाती है। उनके स्वर यंत्र में सूजन आ जाती है। इसे लेरिन्जाइटिस कहते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
क्या है लेरिन्जाइटिस
लेरिन्जाइटिस का अर्थ स्वर यंत्र है। यह बीमारी आमतौर पर संक्रमण या गले के अत्यधिक उपयोग की वजह से होती है, जिससे आवाज बैठ सकती है, गले में खराश हो सकती है और सूजन भी हो जाती है। वायरल संक्रमण (जैसे सर्दी और फ्लू) जीवाणु संक्रमण, अत्यधिक उपयोग (ज्यादा चिल्लाना या गाना) धूम्रपान या प्रदूषण से भी यह बीमारी होती है।
यह है लक्षण
बोलने के दौरान दर्द गले में सूजन, आवाज बैठना, गले में खराश होना, इस बीमारी के लक्षण हैं।
यह है उपचार
अगर आप लेरिन्जाइटिस से ग्रसित हैं तो आपको अपने गले को आराम देना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें। एंटीबायोटिक लेने के साथ गुनगुना पानी पीएं। दिन में कई बार नमक के पानी से गरारे भी करें।