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Farrukhabad News: सड़कों पर मक्के सुखाने से सफर में हादसों का खतरा

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फोटो-20 गांव बहिदपुर के पास इटावा-बरेली हाईवे पर फैली मक्का। संवाद - फोटो : 1
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फर्रुखाबाद। गर्मी वाली मक्का खेतों में काटी जा रही है। खंदाई के बाद दो से तीन दिन धूप में मक्का सुखाई जाती है। बहुत से किसान खेत या अन्य सुरक्षित स्थान के बजाय आसपास की सड़क पर ही मक्के सुखा रहे हैं। इस दौरान वाहन सवार जान हथेली पर लेकर निकलते हैं। बाइक का पहिया फिसलने पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। कन्नौज में रविवार को एक बच्चे की सड़क पर मक्का फैले होने से दुर्घटना में जान तक चली गई।
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मोहम्मदाबाद क्षेत्र के प्रमुख मार्गों में ताजपुर रोड, नीमकरोरी-संकिसा, पसनिंगपुर आदि की सड़कों पर सुबह होते ही मक्का फैला दी जाती है। आवागमन के लिए बमुश्किल आधी सड़क ही बचती है। जब विपरीत दिशा से वाहन आते हैं तो खतरा बढ़ जाता है। दानों पर चढ़कर पहिये फिसले तो दुर्घटना बचनी मुश्किल हो जाती है। वहीं, शमशाबाद के ढाईघाट रोड व चिलसरा रोड पर भी मक्का फैला कर सुखाई जाती है। कमालगंज-रजीपुर-उधरनपुर मार्ग में कोटिया चौराहा से दरौरा पुल तक जाने वाली सड़क पर ग्रामीणों ने मक्का फैला रखी है।
कोटिया चौराहे से दरौरा पुल 5 किलोमीटर है। वहां से 5 किलोमीटर आगे करमुल्लापुर में जीटी रोड मिलता है। यह सड़क 20 फीट चौड़ी है। सड़क पर पूरे दिन काफी आवागमन रहता है। चौराहे से आगे सिंगुरापुर से काफी दूर तक आधी सड़क पर मक्का फैली है। सदरियापुर, दरौरा के साथ ही कुछ अन्य गांव के लोग भी सड़क पर सूखने के लिए पूरे इत्मीनान से मक्का फैलाते हैं। कोई किसान 100 मीटर तो उसके आगे दूसरा किसान 150 मीटर लंबाई तक में सड़क घेर लेता है। सुबह मक्का फैलाकर लोग इधर-उधर हो जाते हैं। शाम को जल्दी समेट कर चलते बनते हैं। कंझाना के किसान नरेश का कहना है कि सड़क पर नीचे से भी गर्म तेज आंच लगने से मक्का जल्दी ही सूख जाती है। अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के माध्यम से किसानों को जागरूक कराने का प्रयास किया जाएगा, जिससे दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।
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