फर्रुखाबाद/शमसाबाद। गंगा का जलस्तर सोमवार को चेतावनी बिंदु से 15 सेंटीमीटर ऊपर ठहरा रहा। रामगंगा के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। गंगा से शमसाबाद क्षेत्र के गांव समैचीपुर चितार और कटरी तौफीक में तेजी से कटान हो रहा है। गंगा की धारा की चपेट में आने कई ग्रामीणों के खेत कटने लगे है। इससे ग्रामीण भयभीत है।
नरौरा बांध से सोमवार को गंगा में 183233 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। फिलहाल जलस्तर में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। जलस्तर 136.75 मीटर पर ठहरा हुआ है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 11019 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की मात्रा कम होने से जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की कमी हुई है। इस कारण जलस्तर 135 से कम होकर 134.85 मीटर पर आ गया है।
शमसाबाद के गांव कटरी तौफीक और समैचीपुर में गंगा की धारा से कटान तेज हो गया है। समैचीपुर चितार गांव के हारूल खां, मुस्ताक, इजरायल, इदरीश, यासीन, इब्रेहसन, मुनीम, नवीन समेत अन्य ग्रामीणों के खेत गंगा की तेज धारा के कारण कटने लगे है। इसी तरह कटान होता रहा तो उनके पूरे खेत गंगा में समा जाएंगे। इस गांव के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पानी भर गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेश यादव ने बताया कि वह 15 अगस्त को दो नावों से बच्चों को लेकर स्कूल जाएंगे और ध्वजारोहण करेंगे।
अभी भी कई गांवों को जाने वाले मार्गों पर भरा पानी
अमृतपुर। गंगा और रामगंगा का जलस्तर पहले से कम होने के कारण जिन गांवों में पानी भर गया था। उन गांवों से पानी निकलना शुरू हो गया। पानी निकलने के कारण घास व कूड़ा करकट सड़ने से बदबू फैलनी शुरू हो गई है। इससे ग्रामीणों को संक्रामक रोग फैलने की संभावना सता रही है। गांव मंझा की मडै़या, नगला रामप्रसाद, तीसराम की मड़ैया, जोगराजपुर, आशा की मडै़या, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर को जाने वाले रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कुछ गांवों में लोग अभी से बुखार, खासी से पीड़ित है। एसडीएम वसंत कुमार गुप्ता ने बताया कि पानी कम होने से संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना है। स्वास्थ्य विभाग ने टीमें बनाई हैं। उनको गांवों में भेज कर ग्रामीणों को दवा बंटवाई जाएगी।
पानी ने रोक दिया रिश्तेदारों का आना
फर्रुखाबाद। कटरी धर्मपुर जाने वाले गांव के रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ का पानी सड़कों के ऊपर से बह रहा है। सड़कें डूब जाने से वाहनों का आवागमन ठप हो गया है। लोग पैदल व साइकिल से आ-जा रहे हैं। बाइकें व अन्य वाहन न आ पाने से रिश्तेदारों का आना-जाना इन गावों में बंद हो गया है।