डा. डीआर विश्वकर्मा
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डीआरडीए के परियोजना निदेशक डा. डीआर विश्वकर्मा की पुस्तक वाणी प्रबंधन एवं संप्रेषण को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार के लिए चयनित किया है।
यह पुरस्कार उन्हें 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के यशपाल सभागार में दिया जाएगा। पुरस्कार के तहत 50 हजार रुपये क ी धनराशि दी जाएगी।
चंदौली जिले के शहावगंज केे मूल निवासी डा. डीआर विश्वकर्मा की तीन पुस्तकों को वर्ष 2013-2014 में राज्य सरकार पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी दीर्घकालीन साहित्य सेवा पुरस्कार से नवाज चुकी है। इस पुरस्कार के तहत 51 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिया गया था। इसके अलावा वर्ष 2006 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय ने उन्हें युवा विभूति सम्मान दिया था।
वर्ष 2014 में फर्रुखाबाद की संस्था ने वांगविभा ने पंडित सुंदरलाल शुक्ल सारस्वत सम्मान प्रदान किया। इसी वर्ष औरैया प्रोत्साहन निधि संस्था ने श्री कैलाश नारायण अग्रवाल गद्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया। लेखन के साथ ही कला में सिद्घहस्त डा. डीआर विश्वकर्मा को वर्ष 1989-1990 में कैमनिल इंडिया बांबे सम्मानित कर चुक ी है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में डा. डीआर विश्वकर्मा के नाम से बेस्ट पेपर अवार्ड भी दिया जाता है।