फर्रुखाबाद। निर्वाचन कार्यालय को आयोग से भेजे गए बजट में 8.03 लाख रुपये का गोलमाल ऑडिट में सामने आया है। इसमें चयनित फर्म को काम से अधिक भुगतान और जीएसटी का दोहरा भुगतान किया गया है। निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में डीएम से जवाब मांगा है और वसूली की तैयारी की जा रही है।
यह अनियमितता विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों के दौरान हुए खर्च में पकड़ी गई। वित्तीय वर्ष 2021-22 और 22-23 में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ऑडिट टीम ने भुगतान में कई अनियमितताएं पाईं। आयोग के वित्त नियंत्रक ने 12 जुलाई 2023 को जवाब मांगा था। स्थानीय स्तर से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण पत्राचार लगातार जारी है।
10 नवंबर 2025 को वित्त एवं लेखाधिकारी दीपक चंद्र ने आठ बिंदुओं पर जवाब मांगा। उन्होंने आहरण-वितरण अधिकारी से सत्यापित छायाप्रति और जीएसटी भुगतान के साक्ष्य भी मांगे हैं। जून 2025 में अपर जिलाधिकारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट से निर्वाचन आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सभी ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण कराया जाएगा।
निविदा शर्तों के अनुसार सभी दरें कर सहित अंकित होनी थीं। फर्म मेसर्स रॉक्सी रिप्रोग्राफिक्स के प्रोपराइटर के हस्ताक्षर भी थे। इसके बावजूद जीएसटी के 188821 रुपये का दो बार भुगतान कर दिया गया। इसकी वसूली संबंधित कर्मचारी और अधिकारी से की जानी है।
मतदाता पर्ची के मुद्रण की दर 76 पैसे ए-4 साइज पेपर में होनी थी। एक पेपर में दो पर्ची छपने से इसकी दर 38 पैसे रह जाती है। इससे फर्म को 5,21,528 रुपये अधिक भुगतान किया गया। स्वीकृत दरों के बाद भी जीएसटी के 93,008 रुपये अलग से दिए गए। यह कुल 8,03,357 रुपये की धनराशि फर्म से वसूली जानी है।