जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजड़े में तीन कुत्ते फंस गए। सुबह सिरमौरा बांगर पहुंची वन विभाग और कानपुर की रैपिड फोर्स ने इसे बाहर निकाला और क्षेत्र की कांबिंग की। वहीं, गांव में भी जनजीवन पटरी पर लौट आया। सुरक्षा की दृष्टि से ग्रामीण झुुंड बनाकर खेतों में काम करने निकले।
रविवार को डीएफओ और कानपुर रैपिड फोर्स ने बंजारा बस्ती, बेग, हईपुर, सिरमौरा, नगला हीरा सिंह, चांदपुर आदि गांवों में कांबिंग थी। साथ ही जानवर को पकड़ने के लिए कानपुर से आए पिंजड़े में मांस रखा था। सोमवार की सुबह पिंजड़े में जंगली जानवर के बजाए तीन कुत्ते पकड़ में आए।
अमर उजाला से हुई बातचीत में डीएफओ देवेश श्रीवास्तव ने कहा कि मिले पंजों के आधार पर लकड़बग्घे की ही पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि हो सकता है जानवर भाग गया हो। कानपुर की टीम लौट गई है, लेकिन उनकी टीम अभी कांबिंग करती रहेगी।
गौरतलब है कि जंगली जानवर के हमले से दो ग्रामीण घायल हो गए थे। इससे ग्रामीणों में दहशत थी। रविवार को जानवर मारने की सूचना पर डीएफओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। जहां पड़ताल के बाद लकड़बग्घा होने की पुष्टि हुई थी।