फर्रुखाबाद। प्रशासन की सख्ती के बावजूद स्वास्थ्य विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। जिम्मेदारों को निशक्तों पर भी तरस नहीं आता। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में बैठे दिव्यांग बोर्ड में डॉक्टर औपचारिकता पूरी कर डेढ़ घंटे बाद ही चले गए। इससे प्रमाणपत्र बनवाने आए दिव्यांग हाथ में फार्म लेकर भटकते रहे। वहीं कुछ बिचौलिये भी सक्रिय रहे। अधिकांश गरीब दिव्यांग मायूस होकर लौट गए।
सीएमओ कार्यालय में हर सोमवार को दिव्यांग बोर्ड बैठता है। इसमें तीन डॉक्टरों के पैनल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन व नेत्र रोग विशेषज्ञ दिव्यांगों का परीक्षण करते हैं। सोमवार को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सुबह से ही दिव्यांग पहुंच गए। करीब 10.30 बजे डॉक्टर पहुंचे। इस बीच कुछ फार्म जमा किए गए। 12 बजे तक तीनों डॉक्टर चले गए।
दूरदराज से दिव्यांग जब तक पहुंचे, तब तक डॉक्टर जा चुके थे। कक्ष के बाहर खड़े दिव्यांग रामबहादुर, नेत्रहीन रामसेवकी, राजकुमार, कमलेश, आसिफ, बबिता, जयपाल, सदाशिव आदि ने बताया कि वे लोग कई बार आ चुके हैं। कायमगंज, शमसाबाद, अमृतपुर, मोहम्मदाबाद आदि क्षेत्रों से आने में उनके हर बार 100-150 रुपये किराए के खर्च होते हैं।
दिव्यांग प्रमाणपत्र (यूडीआईडी कार्ड) बनवाने को आनलाइन आवेदन भी हो चुके हैं। डॉक्टरों के न मिलने या कागजों में कमी बताकर उन्हें टरका दिया जाता है। इस बार भी डाक्टर नहीं मिले और अगले सोमवार को होली की छुट्टी है। इससे फिर 15 दिन इंतजार करना पड़ेगा।
फार्म जमा कर रुपये वसूलने का आरोप
दिव्यांग कार्ड बनवाने आए फतेहगढ़ निवासी ध्रुव कुमार, ट्राइसाइकिल से पहुंचे कांशीराम कालोनी निवासी फिरोज आदि ने बताया कि कुछ लोग बाहर फार्म जमा कर लेते हैं। अब दिव्यांग प्रमाणपत्र की जगह यूडीआईडी कार्ड बनाया जाता है। कार्ड बनवाने के नाम पर 300 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। अगली बार यदि उन लोगों का कार्ड नहीं बना तो जिलाधिकारी से शिकायत करने जाएंगे।
नेत्रहीन को मृत दिखाकर बंद कर दी गई पेंशन
दिव्यांग कार्ड बनवाने आए कंपिल थाना क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी जमुना प्रसाद को दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। डेढ़ वर्ष से खाते में पेंशन न आने पर परिजनों ने छानबीन की। तब पता चला कि उन्हें कागजों में मृत दिखा दिया गया है। इससे उनकी पेंशन बंद हो गई। अब वह दिव्यांग कार्ड बनवाकर दोबारा आवेदन करेंगे। उन्होंने बताया कि गरीब होने से उनकी फरियाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
दिव्यांग बोर्ड के अध्यक्ष डिप्टी सीएमओ डा.एपी सिंह ने बताया कि वह और लिपिक मनीष कुमार ट्रेनिंग के लिए लखनऊ में हैं। इसी वजह से दिव्यांग बोर्ड नहीं बैठ पाया। अगले सोमवार को बैठने वाले दिव्यांग बोर्ड में सभी मामले निस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा।