मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन चल रहे सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। हालात यह हैं कि जिले में तकरीबन एक सैकड़ा डाक्टरों की कमी चल रही है। अधिकांश सरकारी अस्पताल फार्मेसिस्टों हवाले हैं। कुछ अस्पताल तो ऐसे हैं, जिनको संचालित करने के लिए ये भी सरकार को ढूंढे नहीं मिले हैं।
ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य की समस्या के समाधान के लिए जिले भर में 25 सरकारी अस्पताल कार्यरत हैं। इन अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन तो बने खड़े हैं लेकिन चिकित्सा के नाम पर डॉक्टर नहीं हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीण ही नहीं शहर की जनता के लिए लिंजीगंज में चल रहा 50 बेड का अस्पताल डाक्टरों की बाट जोह रहा है। डाक्टरों की कमी के चलते यहां रोगी तो आते हैं लेकिन वह अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाते।
मोहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंडर में सात सरकारी अस्पताल आते हैं। इन अस्पतालों पर यदि नजर डाली जाए तो न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिरौली का संचालन संजीव शाक्य फार्मासिस्ट कर रहे हैं। धीरपुर का सरकारी अस्पताल फार्मेसिस्ट जितेंद्र त्रिपाठी के हवाले है। खिमसेपुर में डा. आरके बौद्घ सरकारी अस्पताल के प्रभारी हैं। डा. बौद्घ होमियोपैथिक के डाक्टर हैं। पखना में फार्मेसिस्ट अरविंद कुमार रोगियों का इलाज कर रहे हैं और देवसनी अस्पताल भी फार्मेसिस्ट अरविंद सिंह के हवाले चल रहा है। यहां के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अमित अग्रवाल का कहना है कि डाक्टरों की बेहद कमी चल रही है।
कायमगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आठ डाक्टरों के स्थान पर सीएमएस सहित तीन की नियुक्ति है। यहां आने वाले सरकारी अस्पताल बरखेड़ा में फार्मेसिस्ट चंद्रपाल और बिल्सड़ी में ओपी वर्मा फार्मेसिस्ट का कार्य देख रहे हैं। अमृतपुर तहसील मुख्यालय पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आयुर्वेद डा. गौरव वर्मा के हवाले है। तहसील में आने वाले पिथनापुर अस्पताल में फार्मेसिस्ट आशीष शुक्ल और सरह में डा. रूपेश कुमार होमियोपैथिक, जिठौली में डा. पंकज कुमार आयुर्वेद और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सबलपुर में डा. ब्रजेश आयुर्वेद मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
नवाबगंज न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डा. केके सचान और डा. प्रभात तिवारी संविदा पर कार्य कर रहे हैं। अचरा खलवारा में और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अचरिया बाकर में डा. गौरव वर्मा तीन-तीन दिन बैठकर मरीजों को देख रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गदनपुर तुर्रा का अस्पताल फार्मेसिस्ट प्रताप कटियार और दरौरा का न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अनुपम कुमार के हवाले है। ताजपुर में फार्मेसिस्ट अस्पताल चला रहे हैं और न्यामतपुर में आयुर्वेद के अनुपम रोगियों का इलाज कर रहे हैं।
लिंजीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भव्य इमारत बनाकर 50 रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था है। लेकिन यहां अधीक्षक समेत तीन डाक्टरों की पोस्टिंग है। डा. दीपक कटारिया अंडरट्रांसफर चल रहे हैं। केवल आयुर्वेद चिकित्सक के हवाले यह अस्पताल चलाया जा रहा है। 50 बेड के इस अस्पताल मे डाक्टरों की कमी के चलते केवल एक महिला रोगी भर्ती है। सीएमएस डा. एचपी श्रीवास्तव का कहना है कि यहां न महिला डाक्टर है और न ही सर्जन हैं। केवल आयुर्वेद के डाक्टर से काम चलाया जा रहा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राकेश कुमार का कहना है कि जिले में 127 डाक्टरों के पद सृजित हैं। मौजूदा समय में 30 डाक्टरों की किसी तरह से भरपाई कर रहे हैं। इनमें से आठ डा. अंडर ट्रांसफर चल रहे हैं। 22 डाक्टरों से जिले भर के अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी चलाई जा रही हैं। डाक्टरों की बेहद कमी है। पिछले एक साल से लगातार शासन से डाक्टरों की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक डाक्टर नहीं मिले हैं।