फर्रुखाबाद। बहनोई के यहां मकान बनवा रहे भाकियू नेता को पुलिस ने पकड़कर थाने में बंद कर दिया। आरोप है कि मारपीट की गई और मोबाइल तोड़ दिया गया। देर रात में छोड़ते वक्त 10 हजार में से साढ़े तीन हजार रुपये ही दिए गए। इससे नाराज कई जिलों के भाकियू नेता गुरुवार देर शाम थाने पहुंचे और नारेबाजी कर धरने पर बैठ गए। सूचना पर पहुंचे सीओ ने जांच का भरोसा दिया। इसके बाद नेता थाने से चले गए।
कासगंज निवासी भाकियू (सरोज गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव मिश्रा के बहनोई मनोज का मऊदरवाजा थाने के गांव सवायजपुर में मकान बन रहा है। बुधवार शाम को मकान में लगे मजदूरों का पड़ोसी से विवाद हो गया। गौरव की सूचना पर पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई। रात दो बजे दोनों पक्षों को थाने से छोड़ दिया गया। गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे गौरव अपने साथ प्रदेश महासचिव शिवम बघेल, एटा जिलाध्यक्ष राहुल पाठक, कौशल पंडित, स्थानीय जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह पाल, रोहित पाल समेत करीब 50 लोग थाने पहुंच गए।
इन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सभी कार्यकर्ता दरी बिछाकर थाने में ही बैठ गए। गौरव ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें पकड़ लाई और हवालात में बंद कर दिया। रात में उसे पीटा गया। जेब में 10 हजार रुपये ले लिए और मोबाइल भी तोड़ दिया। रात करीब दो बजे उन्हें थाने से छोड़ा, तो मात्र साढ़े तीन हजार रुपये ही वापस किए गए। पुलिस ने थाने में उनके साथ अन्याय किया। यही नहीं उसे एसी/एसटी एक्ट के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।
सूचना मिलते ही सीओ सिटी थाने पहुंच गए। उन्होंने पांच प्रमुख नेताओं को कमरे में बैठाकर वार्ता की। सीओ ने करीब आधा घंटे तक नेताओं को समझाया। इसके बाद मामला शांत हुआ। रात करीब साढ़े सात बजे सभी नेता थाने से चले गए। सीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि मारपीट और रुपये लेने का आरोप गलत है। फिर भी सीसीटीवी कैमरे की जांच करके कार्रवाई की जाएगी। बुधवार रात दोनों पक्षों में समझौता होने पर ही छोड़ा गया था।