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Farrukhabad News: भगवान बुद्ध की झांकी संग निकली धम्म यात्रा

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संकिसा। धम्मा लोको बुद्ध विहार से सोमवार सुबह सात बजे भगवान बुद्ध की झांकी के साथ धम्म यात्रा निकाली गई। बौद्ध धर्म के अनुयायी नारे लगाते हुए स्तूप तक पहुंचे। वहां तीन परिक्रमा करने के बाद मोमबत्ती अगरबत्ती लगाकर पूजा-अर्चना की। डॉ. धम्मपाल ने परित्राण पाठ एवं बुद्ध वंदना से पूजन कराया।
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महोत्सव के सहसंयोजक डॉ. धम्मपाल महाथैरो ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा वाली झांकी का पूजन किया। संयोजक कर्मवीर शाक्य ने पंचशील लहराकर धम्म यात्रा को रवाना किया। यात्रा आठ बजे स्तूप पहुंची। डॉ. धम्मपाल ने कहा कि इंद्र और ब्रह्मा के बीच में 300 वर्ष पूर्व इसी अचल स्तूप पर भगवान बुद्ध उतरे थे। सम्राट अशोक ने 84 हजार स्तूप बनवाए थे। अचल स्तूप केवल संकिसा में है। स्तूप में बुद्ध के अवशेष हैं। धम्म को समझने में विपश्यना की जरूरत है। उन्होंने चार धर्म चित, चैतसिक, कुशल और अकुशल धम्म का उपदेश दिया।

कुशीनगर के भिक्षु नवरत्न महाथैरो ने बताया कि मैत्री की शक्ति से कोई भी खूंखार व्यक्ति कुछ बिगाड़ नहीं सकता। स्तूप की वर्तमान में स्थित बहुत खराब है। हमारी किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि भारतीय पुरातत्व विभाग से लड़ाई है। एएसआई ने इसे अचल स्तूप की मान्यता दी है। पहला कदम जिस स्थान पर भगवान बुद्ध का पड़ता है वह अचल स्तूप होता है।
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200 पौधे दान कर बच्चों का किया सहयोग
संकिसा। बुद्ध महोत्सव में औरैया व कन्नौज की संस्थाओं ने 200 पौधे दान किए। ध्रुव तारा साइंस सेंटर के प्रवक्ताओं ने जादू के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण को सच करके दिखाया। जरूरतमंद 50 छात्र-छात्राओं को कॉपी-पेन, पेंसिल वितरित की। अशोक कुमार शाक्य, राजेश कुमार शाक्य, प्रिया शाक्य, ओमकार सिंह शाक्य, पुष्पेंद्र सिंह शाक्य, राज कुमार शाक्य, पिंकेश कुशवाहा आदि का सहयोग रहा। (संवाद)


मां विसारी देवी का खीर से लगाया भोग, जयकारे लगाए

संकिसा। शरद पूर्णिमा पर सोमवार को धम्म यात्रा खत्म होते ही 10:30 बजे मां विसारी देवी सेवा समिति के अध्यक्ष अतुल दीक्षित की अगुवाई में संतों के साथ 500 सनातन धर्मी हाथ में हनुमानजी का ध्वज लेकर पहुंचे। माता के टीला के पास तक जयकारे लगाते चल रहे थे। वहां से माता का भोग लगाने के लिए अतुल दीक्षित के साथ भोलेपुर दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के महंत मोहनदास महाराज, महंत विष्णु दास, महंत जगदीश दास, हरिशंकर एवं रामवीर दुबे ने मंदिर पहुंचकर मां विसारी देवी को खीर का भोग लगाया। इसके बाद सभी भक्त नीचे उतरे और वहां मौजूद लोगों को खीर का प्रसाद वितरित किया। समिति के अध्यक्ष अतुल दीक्षित ने बताया कि इस टीले पर विसारी देवी विराजमान हैं। बौद्ध धर्म का टीला दक्षिण दिशा में यहां से करीब 200 फीट दूर स्थित है। भोलेपुर हनुमान मंदिर के महंत मोहनदास महाराज ने बताया कि भगवान सभी के एक हैं, लेकिन उनसे मिलने के रास्ते अलग हैं। (संवाद)
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