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धीमरपुर व सोता बहादुरपुर के नाले गिर रहे गंगा में

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माधवपुर में गंगा की ओर जाता नाले का पानी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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मौनी अमावस्या पर भक्तों को प्रदूषित जल में डुबकी लगानी होगी। शासन ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं।
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इसमें नालों की टैपिंग करना और जैविक उपचार (बायो रेमिडिएशन) के निर्देश हैं, लेकिन अफसरों ने इन कामों में सिर्फ औपचारिकता ही निभाई है। माधवपुर और भैरों घाट के पास एक टंकी से जैविक ट्रीटमेंट की व्यवस्था की गई है जबकि धीमरपुर और सोता बहादुरपुर के दो-दो नाले गंगा में सीधे गिर रहे हैं।
आठ फरवरी को सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई फरेश कुमार ने माधवपुर नाले का निरीक्षण किया था। इसके पानी को डायवर्ट बताया गया था, लेकिन बुधवार को नाला डायवर्ट नहीं मिला। इसमें एक टंकी से जैविक उपचार के लिए कुछ बूंदे टपकाई जा रही थीं। ग्रामीणों ने बताया कि 24 घंटे में एक बार टंकी भरी जाती है। रात तक पानी खत्म हो जाता है।
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धीमरपुरा के नाले में रंगीन पानी गंगा में गिर रहा था। इस नाले के पानी को गंगा में गिरने से रोकने की जरूरत नहीं समझी गई। यहां से बमुश्किल 100 मीटर दूर पांचाल घाट है। नाले का पानी और कपड़ा उद्योगों का रंगीन पानी गंगा में बह रहा है। एक अन्य नाला भी यहां गिर रहा। सोता बहादुरपुर में भी दो नाले गंगा में गिराए जा रहे हैं।
भैरोंघाट के पास पुलिया बनी है। उसके किनारे से तेज रफ्तार से गंदा पानी गंगा में जाता मिला। मंदिर के पास 1000 लीटर की टंकी रखी थी। वह जैविक उपचार के पदार्थ से आधी भरी थी। आसपास के लोगों ने बताया कि शाम तक यह खत्म हो जाएगी। दिन में 10 बजे के करीब इसे एक टैंकर से भरा जाता है। सब कुछ खानापूरी है।
माधवपुर में जब निरीक्षण किया था, तो नाला बंद था। मामूली पानी जा रहा था, उसका जैविक ट्रीटमेंट हो रहा था। गुरुवार को सभी वस्त्र छपाई कारखानों में काम नहीं होगा। यदि रंगीन पानी दिखा, तो संबंधित पर कार्यवाई की जाएगी। - फरेश कुमार, जेई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर।
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