अमृतपुर/कायमगंज। मानसून आने में हो रही देरी अब गन्ना किसानों पर भारी पड़ने लगी है। बढ़ते तापमान से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। फसल बचाने के लिए किसान बार-बार सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है।
अमृतपुर तहसील क्षेत्र में करीब 3200 हेक्टेयर तथा कायमगंज क्षेत्र में 3600 हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती की गई है। समय पर मानसून आने से गन्ने की फसल में तीन से छह बार सिंचाई पर्याप्त रहती है, लेकिन इस बार बारिश में देरी से आठ से दस बार तक पानी लगाना पड़ सकता है। खेतों की नमी बनाए रखने के लिए किसान लगभग हर सप्ताह सिंचाई कर रहे हैं।
गांव भटासा के किसान बृजेश गंगवार ने बताया कि उनके पास 40 बीघा गन्ने की फसल है। एक बीघा खेत की सिंचाई करने में करीब एक घंटे लगता है और बिजली के ट्यूबवेल से सिंचाई पर लगभग 100 रुपये प्रति घंटा खर्च आता है। चार अतिरिक्त सिंचाई करने से उनकी फसल पर करीब 16 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
फोटो-33 प्रभाकर त्रिवेदी।
गांव कुम्हरौर के किसान प्रभाकर त्रिवेदी ने बताया कि तेज गर्मी से गन्ने की बढ़वार प्रभावित हो रही है। यदि जल्द बारिश शुरू हो जाए तो फसल को राहत मिल सकती है।
फोटो-34 शैलेंद्र यादव।
किराचन के किसान शैलेंद्र यादव का कहना है कि तेज धूप से गन्ने की पत्तियां सूखने लगी हैं। किसान पंपसेट और सबमर्सिबल चलाकर लगातार सिंचाई कर रहे हैं। यदि मानसून में और देरी हुई तो फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा।
-जून और जुलाई की बारिश गन्ने की फसल के लिए सबसे अधिक लाभदायक होती है। तापमान अधिक रहने पर खेतों में नमी बनाए रखना जरूरी है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से गन्ने की बढ़वार और उत्पादन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।-
डॉ. महेंद्र प्रसाद राजभर, कृषि वैज्ञानिक
फोटो-32 बारिश न होने से अमृतपुर में सूख रही गन्ना की फसल। संवाद
फोटो-32 बारिश न होने से अमृतपुर में सूख रही गन्ना की फसल। संवाद