आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की शाखाओं में ग्राहकों को रुपये नहीं मिल रहे हैं। रुपये निकालने ग्रामीण रोज बैंक के बाहर सुबह से लाइन में लगते हैं इसके बावजूद उन्हें बैंक में कैश न होने का हवाला देकर वापस कर दिया जाता है। इससे आक्रोशित लोगों ने शुक्रवार को कायमगंज में बैंक के बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
वहीं कमालगंज में रुपये न मिलने पर बैंक के अंदर खड़े लोगों ने बैंक कर्मचारियों को अंदर आने सो रोक दिया। पुलिस के समझाने पर लोग शांत हुए। कायमगंज में खाते से रुपये न निकलने से गुस्साई लक्ष्मी, नाजमा बेगम, शारदा, नारायण देवी, अजीत सिंह, मुश्ताक अहमद, श्यामपाल और नन्हकू समेत सैकड़ों ग्राहकों ने शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे बैंक के बाहर मुख्यमार्ग पर जाम लगा दिया।
इसी दौरान कोर्ट जा रहे मुंसिफ मजिस्ट्रेट मिराज अहमद भी जाम में फंस गए। जाम लगाए लोगों ने कहा कि हम लोगों के घरों में खाने के लिए अनाज खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। बैंक आ रहे हैं लेकिन रुपये नहीं निकल रहे हैं। जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस लोगों को समझा-बुझाकर बैंक के अंदर ले गई। शाखा प्रबंधक से बात करने के बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। शाखा प्रबंधक अरविंद चौरसिया ने बताया कैश न मिलने के कारण भुग्तान नहीं हो पा रहा है। सोमवार को भुगतान करने की बात पर ग्राहक वहां से चले गए।
उधर, कमालगंज प्रतिनिधि के मुताबिक कसबा स्थित ग्रामीण बैंक ऑंफ आर्यावर्त में पांच दिन से ग्राहक पूरा दिन लाइन में लगकर बैरंग घर वापस लौट रहे हैं। इससे गुस्साए ग्राहकों ने शुक्रवार को बैंक में हंगामा करना शुरू कर दिया। कमालगंज निवासी राजू, महमदपुर अचला निवासी राहुल का आरोप है कि वह पिछले पांच दिन से बैंक में लाइन में लगे और शाम को वापस घर लौट गए। नसरतपुर निवासी ओमवती का कहना है कि उसकी 11 वर्षीय बेटी रचना बीमार चल रही है। दवा के लिए बैंक के चक्कर काट रही है।
उसक पास दवा तक के पैसे नहीं हैं। धारा नगला निवासी विनीता और नगू नगला निवासी सुमन का आरोप है कि उसकी मां का फर्रुखाबाद स्थित प्राइवेट अस्पताल में आपरेशन हुआ है। उसके खाते में 35 हजार रुपये जमा हैं। वह एक सप्ताह से बैंक के चक्कर लगा रही हैं लेकिन उसे भुगतान नहीं दिया जा रहा है।
खूटादेव निवासी शिवानी का कहना है कि वह चार दिन से चक्कर लगा रही है। खेतों में काम करनी वाली लेबर पैसे न मिलने के कारण काम छोड़ गई है। महमदपुर अचला निवासी जायदा का आरोप है कि उसके पास बच्चे की दवा तक के पैसे नहीं हैं। शाखा प्रबंधक विजय वर्मा का कहना है कि 22 नवंबर को पांच लाख रुपये कैश आया था।
उसके बाद कैश नहीं दिया गया। इस कारण लाइन में लगे लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने कर्मचारियों को बैंक के अंदर नहीं घुसने दिया। उन्होंने ग्राहकों के सामने ही बैंक अधिकारियों से बात की तब जाकर ग्रामीणों ने बैंक में जाने दिया। उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम 4 बजे से बैंक में कनेक्टीविटी नही आ रही है। इसके चलते रुपये जमा करने वाले ग्राहकों को भी खासी दिक्कतें आ रही हैं।
नोटबंदी के 17वें दिन नगर की सेंट्रल बैंक, इंडसंइड बैंक और आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में शुक्रवार को भी करेंसी नहीं आई। सेंट्रल बैंक में नोट न बदले जाने की सूचना पर बैंक के बाहर व अंदर रोज की अपेक्षा काफी कम भीड़ थी। हालांकि बैंक में अफरातफरी का माहौल रहा। ग्राहकों का कहना है कि वह तीन-चार दिनों से पैसे निकालने के लिए बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
क्षेत्र के गांव ललई निवासी सुरेशचंद्र ने बताया कि वह दो दिनों से बैंक आ रहे हैं। खेतों में खाद-पानी के लिए पैसों की जरूरत है लेकिन पैसे नहीं निकल पा रहे हैं।
मिलकिया खिनमनी निवासी नवाब सिंह ने बताया कि 27 नवंबर को उसकी नातिन अर्चना की शादी है। नातिन की शादी के लिए पैसे निकालने के लिए तीन दिन से बैंक के चक्कर काट रहा हूं पर पैसे नहीं मिले हैं। बैंककर्मी कह रहे हैं कि कैश नहीं है।
तुर्क ललैया निवासी कालीचरन के बताया कि उसने अपनी आंखों का आपरेशन कराया है, जिसके लिए दवा लानी है। बैंक से दो हजार रुपये मांग रहा हूं वह भी नहीं मिल पा रहे हैं। अकाखेड़ा निवासी अखिलेश कुमार ने बताया कि घर में खाने को कुछ नहीं बचा है। चार दिन से बैंक के चक्कर काट रहा हूं लेकिन कैश न होने के कारण वापस चला जाता हूं।