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नगर पालिका में करोड़ों के वाहन, संसाधन हो रहे कबाड़

Thu, 23 Aug 2018 11:37 PM IST
फर्रुखाबाद
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मोबाइल शौचालय। - फोटो : अमर उजाला
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नगर पालिका प्रशासन ने सफाई और पेयजल आदि सुविधा मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपये के वाहनों और अन्य संसाधनों की खरीद की। पर ये वाहन और संसाधन पालिका के स्टोर रूम में कबाड़ हो रहे हैं। खरीद करने के बाद इनका उपयोग बमुश्किल एक-दो बार ही किया गया है। कई उपकरण तो उपयोग में ही नहीं लाए गए। फिर चाहें वह करीब 23 लाख की लागत से खरीदा गया रिफ्यूज कंपेक्टर, दो डंपर हों या फिर सक्शन मशीन। इस समय नगर पालिका के पास 80 वाहन हैं, इनमें 50-60 वाहन ही प्रतिदिन चलते हैं। पालिका द्वारा खरीदे गए इन संसाधनों की जिला प्रशासन यदि गंभीरता से जांच कर ले तो कई जिम्मेदारों की गर्दन फंसनी तय है।   
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 शहर में आने वाले लोगों को शौच आदि के लिए दिक्कत न हो। इसके लिए पालिका प्रशासन ने करीब दो साल पहले छह सीटर के छह और दस सीटर के छह मोबाइल शौचालयों की खरीद की थी। छह सीटर की कीमत करीब आठ और दस सीटर की कीमत करीब नौ लाख रुपये है। ये मोबाइल शौचालय सार्वजनिक स्थानों के बजाय पालिका परिसर में ही जंग खा रहे हैं। यह भी इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। वहीं, शहर में सार्वजनिक शौचालय की उचित व्यवस्था न होने से लोगों को शौचालय की जरूरत पड़ने पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। इसके अलावा नगर पालिका प्रशासन ने छोटी सक्शन मशीन, मोबाइल पानी का टैंक, हाइड्रोलिक रिक्शे, छोटे व बड़े कूड़ादान और कूड़ागाड़ी समेत अन्य संसाधनों की भी खरीद की। पर अधिकतर संसाधन नगर पालिका के स्टोर रूम में पड़े-पड़े कबाड़ हो रहे हैं।
 
रिफ्यूज कंपेक्टर दो साल में एक बार चला
पालिका प्रशासन ने 26 जनवरी 2016 को दिल्ली की टीपीएस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी से करीब 23 लाख रुपये की लागत से रिफ्यूज कंपेक्टर खरीदा था। इसका उपयोग करीब पांच टन कूड़ा एक बार में उठा ले जाने के लिए किया जाता है। पालिका सूत्रों की मानें तो रिफ्यूज कंपेक्टर वाहन का उपयोग अभी तक सिर्फ एक बार ही किया गया है। यह वाहन पालिका के स्टोर रूम में खुले में खड़ा है। इसमें जंग तक लगने लगी है।
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डंपर भी चार-पांच बार ही चले
फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों में कूड़ा एकत्र करने के लिए करीब तीन साल पहले दो डंपर खरीदे गए थे। पालिका के कर्मचारियों की मानें तो ये डंपर भी बमुश्किल चार-पांच बार ही चलाए गए होंगे। तब से यह डंपर भी खुले में पड़े-पड़े जंग खा रहे हैं।

जरूरत पड़ने पर निकाले जाते हैं वाहन - महेश
वाहनों की देखरेख कर रहे सफाई नायक महेश कुमार ने बताया कि डंपर, रिफ्यूज कंपेक्टर को चलवाया जा चुका है। इनकी जहां जरूरत पड़ती है, वहां भेजकर इन वाहनों का उपयोग किया जाता है। मोबाइल शौचालय पर्वों, वीआईपी कार्यक्रमों और मेला आदि के दौरान चेयरमैन और ईओ के आदेश पर खड़े कराए जाते हैं।

वाहनों का इस्तेमाल ही नहीं किया जाता - हरिओम
सफाई कर्मचारी संघ के नेता हरिओम बाल्मीकि का कहना है कि पालिका प्रशासन ने काफी वाहन और उपकरणों की खरीद की है लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। पालिका के स्टोर रूम में करोड़ों रुपये के वाहन और उपकरण कबाड़ हो रहे हैं। इनकी कोई देखभाल भी नहीं करता है।

दबा दी जाती है आवाज - सभासद
सभासद अनुभव कनौजिया लव का कहना है कि कमीशनबाजी के चक्कर में उन वाहनों की खरीद भी कर ली जाती है, जिनका उपयोग काफी कम होता है। यही नहीं पालिका प्रशासन पुराने वाहनों को ठीक कराने के बजाय उसे कबाड़ होने के लिए छोड़ देती है और कमीशनबाजी तय कर नए वाहनों की खरीद कर लेती है। उन्होंने व उनके गुट के सभासदों ने जब इसकी आवाज उठाई तो दबा दी गई। उन्होंने बताया कि एक-दो दिन में जिलाधिकारी से मिलकर इसकी शिकायत की जाएगी।

इस मामले की कराएंगे जांच - ईओ
एसडीएम सदर को ईओ नगर पालिका की भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। इस मामले की जांच कराएंगे। कितने वाहन नए खरीदे गए और कितने चल रहे हैं। जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पालिका अध्यक्ष का नहीं उठा फोन, पति ने दिया जवाब
पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल को कई बार फोन किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उनके पति मनोज अग्रवाल ने बताया कि पालिका जो वाहन खरीदती है, उन्हें चलवाया जाता है। रिफ्यूज कंपेक्टर तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर 14वें वित्त की धनराशि से खरीदा गया था। इसका उपयोग सालिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट न लगने से नहीं हो पा रहा है।
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