अमृतपुर के गांव गौशिया में खेतों में फसल चरते अन्ना मवेशी।
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अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। अन्ना गोवंशों के आतंक के आगे अन्नदाता बेबस हैं। फसल बचाने के लिए कोई जुगाड़ काम नहीं आ रही है। इससे उन्हें रात खेत में गुजारनी पड़ रही है। दिन में नजर हटते ही अन्ना गोवंश फसल को तबाह कर देते हैं। इससे किसान दुखी हैं।
अन्नदाताओं की फसल को गोवंशों से बचाने के लिए भले ही उत्तर प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन अन्नदाताओं को समस्या से निजात नहीं मिल रही है। तहसील क्षेत्र में गोवंशों के आतंक से वे परेशान हैं। अपनी फसल गोवंशों से बचाने के लिए किसान लाठी लेकर रात दिन खेतों में ही रहने को मजबूर हैं।
गोवंशों का झुंड जिस खेत में पहुंच जाता है वहां पूरी फसल साफ हो जाती है। खेतों में इन दिनों गेहूं, चना, मसूर, जौ, मटर, सरसों आदि की फसल है। इन्हीं से अन्नदाताओं को पूरे साल पेट पालने का इंतजाम करना होता है। खून पसीने से तैयार हो रही यह इन फसलों पर गोवंश पानी फेर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरकार ने अन्ना गोवंशों के लिए गोशाला तो बनवाईं। पर जिम्मेदार अन्ना गोवंशों को पकड़वा ही नहीं रहे हैं। इससे उनकी फसलें तबाह हो रही हैं। बुधवार को गौटिया में एक किसान के खेत में गेहूं की फसल में गोवंशों का झुंड पहुंच गया। देखते-देखते फसल को चट कर गए।
किसान रामसिंह, राधा मोहन, ब्रजराज, कैलाश आदि कहते हैं कि गोवंशों से फसल बचाने के लिए खेतों के चारों ओर कटीले तार व प्लास्टिक की रस्सी भी लगाते हैं। पर कोई जुगाड़ काम नहीं आ रही है। गोवंश इन्हें ध्वस्त कर खेत में घुस जाते हैं।