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Farrukhabad News: 18.94 करोड़ से बन रही क्रिटिकल केयर यूनिट, सितंबर तक होगी तैयार

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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल परिसर में 18.94 करोड़ से बन रही क्रिटिकल केयर यूनिट (ट्रॉमा सेंटर) सितंबर तक तैयार हो जाएगी। निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ने से समय से निर्माण पूरा करने की उम्मीद है। आधुनिक उपकरणों से लैस ट्रॉमा सेंटर में अति गंभीर मरीजों को इलाज मिलेगा। इससे गंभीर मरीज रेफर नहीं होंगे।
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जनपद में गंभीर मरीजों के इलाज की बेहतर सुविधा न होने से अक्सर उन्हें हायर सेंंटर रेफर किया जाता है। समय कम होने से कई बार मरीजों को मेडिकल कॉलेज सैफई, कन्नौज व कानपुर पहुंचना मुश्किल पड़ जाता है और उन्हें जान गंवानी पड़ जाती है। गंभीर मरीजों को जिले में उपचार मिले, इसके लिए लोहिया अस्पताल परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट (ट्रॉमा सेंटर) का निर्माण कराया जा रहा है। 1200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में चार मंजिल भवन निर्माण पर 18 करोड़ 94 लाख रुपये खर्च निर्धारित है। निर्माण की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल को सौंपी गई है।
ट्रॉमा सेंटर को तीन जोन में बांटा जाएगा। रेड जोन में प्रवेश प्रतिबंधित होगा। इसके अलावा येलो व ग्रीन जोन बनाया जाएगा। इसमें डायलिसिस, आईसीयू व अल्ट्रासाउंड के अलावा अन्य कई प्रकार की जांचों की व्यवस्था होगी। प्रसव कक्ष का भी निर्माण होगा। 50 बेड के इस ट्रॉमा सेंटर में 20 वार्ड बनाए जाएंगे। चार मंजिल भवन होने से रैंप के अलावा ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट की भी व्यवस्था होगी। हालांकि, अप्रैल 2024 से शुरू हुआ निर्माण कार्य धीमी गति से चलता रहा। अब निर्माण सितंबर तक पूरा करने के आदेश होने से काम की रफ्तार भी बढ़ गई है।
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प्रतिदिन गंभीर मरीज होते हैं रेफर
दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो या फिर आग से झुलसा हो। सीएचसी से प्राथमिक उपचार के बाद सीधे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। लोहिया अस्पताल में भी संसाधनों का अभाव बताकर इन मरीजों के अलावा गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों को भी सीधे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ट्रॉमा सेंटर का संचालन शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर समय से बेहतर इलाज मिलेगा। इससे उनकी जान बचने की संभावना अधिक रहेगी।

35 फीसद हो चुका निर्माण
कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के अवर अभियंता प्रियेश कुमार ने बताया कि क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण 35 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। अब निर्माण कार्य तेजी से कराने के निर्देश दिए गए हैं। 18 माह का अनुबंध होने से सितंबर तक निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। भवन हस्तांतरण के बाद संचालन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
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