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हिस्ट्रीशीटर की हत्या पप्पू कोरी ने सुपारी देकर कराई थी

Wed, 23 Mar 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
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प्रेसवार्ता करते एसपी। - फोटो : अमर उजाला
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हिस्ट्रीशीटर की छह महीना पहले हुई हत्या के मामले में पुलिस ने सर्विलांस के सहारे तीन आरोपियों को दबोच लिया है। पुलिस ने पकड़े गए शातिरों से तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं। कोतवाल हत्याकांड में निरुद्घ चल रहे पप्पू कोरी ने सुपारी देकर हिस्ट्रीशीटर की हत्या कराई थी।
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शहर कोतवाली के मोहल्ला बागलकूला निवासी हिस्ट्रीशीटर अजय पाल सिंह 7 सितंबर 2015 को अपने घर के बाहर चारपाई पर सो रहा था। इसी बीच उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की सूचना मिलने पर पत्नी गुड्डी देवी ने शहर के लालगेट निवासी बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रताप नरायन, उनके भाई सुभाष नरायन, बेटे पवन के अलावा बाग लकूला निवासी महेंद्र कुमार के खिलाफ घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस ने पवन को मुकदमे से बरी कर दिया, जबकि अन्य के खिलाफ चार्जशीट लगा दी थी। इस बीच स्वाट प्रभारी को सर्विलांस से हत्या के मामले में महत्वपूर्ण सुराग लगे। इसके बाद टीम ने पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने बाग लकूला निवासी मनीष शाक्य को दबोच लिया।
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पूछताछ के बाद मनीष ने हत्या का खुलासा किया। इसके बाद टीम ने गांव चांदपुर निवासी मुकेश भाष्कर और गांव भगुआ नगला निवासी ललित यादव को भी पकड़ लिया। मंगलवार को एसपी राजेशकृष्ण ने पुलिस लाइन सभागार में वार्ता के दौरान कहा कि पप्पू कोरी निवासी बागलकूला ने 50 हजार रुपये की सुपारी देकर हिस्ट्रीशीटर की हत्या मनीष और उसके साथियों से कराई थी। उन्होंने बताया कि पप्पू कोरी और अजयपाल सिंह के बीच विवाद चल रहा था।


जिला जेल से फोन कर दी थी सुपारी
शहर कोतवाली के मोहल्ला बाग लकूला निवासी पप्पू कोरी तत्कालीन शहर कोतवाल राजकुमार सिंह की गोली मार कर हत्या करने के मामले में जिला जेल में निरुद्घ चल रहा है। पप्पू कोरी को इस बात की जानकारी हुई कि हिस्ट्रीशीटर अजयपाल सिंह ने उसकी मुखबिरी कोतवाल से की थी।  इसके बाद पप्पू कोरी ने जेल से ही मनीष शाक्य को फोन कर उसे हत्या करने की सुपारी दी थी। उसने चांदपुर निवासी मुकेश भाष्कर से 50 हजार रुपये भी लेने को कहा था। इस फोन के बाद ही पुलिस ने सर्विलांस के सहारे इन लोगों की गिरफ्तारी की।

पुलिस की विवेचना पर लगा सवालिया निशान
हिस्ट्रीशीटर अजयपाल की हत्या में नामजद लोग पुलिस की लापरवाही से करीब छह माह जेल की सलाखों के पीछे रहे।  इस मुकदमे में की गई विवेचना पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। यदि विवेचक ने सही विवेचना की होती तो शहर के संभ्रात लोगों को जेल यातना नहीं सहनी होती।

 पुलिस की जांच में अचानक नया मोड़ आ जाने से उस समय की गई जांच में सवालिया निशान लग गया है। पुलिस की लापरवाही के कारण बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष समेत अन्य लोगों को जेल की हवा खानी पड़ी। हालांकि इस बारे में कोई भी अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सीओ सिटी योगेश कुमार ने बताया कि मामला ट्रायल पर चल रहा है। वह लोग कागजातों को कोर्ट में भेजेंगे। आगे चलकर उनको राहत मिलेगी।
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