जातिसूचक गाली देने की रिपोर्ट रोजनामचे में लिखने पर भूना के एसएचओ राम सिंह को खामियाजा भुगतना पड़ा है। इसको लेकर एसपी ने तुरंत प्रभाव से एसएचओ को हटाकर लाइन हाजिर कर दिया है, क्योंकि एसएचओ राम सिंह ने मामले को लेकर एसपी से संपर्क करने की बजाय रपट रोजनामचे में लिख दी थी।
इस पर एसपी ने एएसआई इंद्र सिंह, एसएचओ रामसिंह तथा पीसीआर चालक भीम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। दूसरी ओर, एसएचओ रामसिंह ने मामले को लेकर डीजीपी हरियाणा, आईजी हिसार, एसपी फतेहाबाद को लिखित पत्र भेजकर जातिसूचक गाली देने के मामले पर समुदाय विशेष के इंद्र सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
एसएचओ ने अपनी रपट में आरोप लगाया है कि इंद्र सिंह ने अपने किसी स्वार्थ के चलते सोमवार को एमपी सोत्र में एक महिला द्वारा फांसी लगाने को लेकर समझौता करवा दिया था। लेकिन इस बीच उन्होंने मौके पर पहुंचकर घटना से संबंधित संज्ञान लिया और 174 की कार्रवाई कर पोस्टमार्टम करवा दिया था। इससे एएसआई इंद्र सिंह का स्वार्थ हल नहीं हो सका और पीसीआर चालक भीम सिंह की मौजूदगी में उसने उन्हें जातिसूचक शब्द कहे निकाली।
एसएचओ राम सिंह ने कहा है कि इससे मेरे और मेरे समाज को ठेस पहुंची है। रपट में बताया गया है कि इंद्र सिंह महिला पक्ष के लोगों से मिलकर मामले को नया मोड़ देना चाहते थे, ताकि सरकार से ओलावृष्टि नुकसान की आड़ में मुआवजा हासिल किया जा सके। रपट में एसएचओ ने एएसआई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जाति विशेष के कारण मुंशी ने भी गलत बयानी की है, जबकि वह उस समय न तो थाने में हाजिर था और ना ही मोबाइल टावर लोकेशन भूना की है। एसएचओ राम सिंह ने आरोप जड़ा कि मुंशी ने भी इंद्र सिंह को फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। रोजनामचा रपट के कुछ ही घंटों बाद एसपी फतेहाबाद ने एसएचओ, एएसआई व पीसीआर चालक को लाइन हाजिर कर दिया है। लेकिन एसपी ने शिकायतकर्ता एसएचओ पर ही गाज क्यों डाली, यह सवालों का विषय बना हुआ है।
इस बारे में एसपी ओपी नरवाल से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मीटिंग में होने का हवाला दिया और बाद में बात करने को कहा।