जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजन चौधरी ने शहर कोतवाल के कातिल को सजा ए मौत
सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। मृत्युदंड की पुष्टि
के लिए पत्रावली उच्च न्यायालय को भेजी जाएगी। शहर कोतवाल राजकुमार सिंह
फोर्स के साथ 29 नवंबर 2014 को सभासद राकेश गंगवार पर हमले के आरोपी बाग
लकूला निवासी चंद्र कुमार उर्फ पप्पू कोरी के घर दबिश देने गए थे। इस दौरान
पप्पू कोरी ने उन्हें गोली मार दी। कोतवाल की मौत के बाद पुलिसकर्मियों ने
दौड़ाकर पप्पू कोरी को धर दबोचा। एसएसआई हरिश्चंद्र ने पप्पू कोरी के
खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर आरपी यादव ने
23 दिसंबर 2014 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अधीनस्थ न्यायालय से
तीन जनवरी 2015 को पत्रावली सत्र न्यायालय को परीक्षण के लिए सुपुर्द कर
दी गई। जिला जज ने छह जनवरी को आरोप तय किया। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय
अधिवक्ता रनवीर सिंह यादव व बचाव पक्ष के वकील राजेंद्र सिंह कटियार
ने
दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने के बाद जिला जज राजन चौधरी ने हत्यारोपी
पप्पू कोरी को 302, 506 आईपीसी व 25/27 आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया।
302 आईपीसी में दोष सिद्ध अभियुक्त पप्पू को मृत्यु दंड की सजा से दंडित
किया। 506 आईपीसी में दो साल की सजा सुनाई। दस हजार रुपये जुर्माना किया।
जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा, 25 ए अर्म्स एक्ट के
जुर्म में तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये से दंडित किया। जुर्माना अदा न
करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा तथा 27 (1) के जुर्म में दो साल चार माह
की सजा व पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना अदा न
करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है। जिला जज ने अर्थदंड
की धनराशि अदा होने पर आधी धनराशि मृतक इंस्पेक्टर के आश्रित को दिए जाने
का आदेश दिया है। तत्कालीन शहर कोतवाल राजकुमार सिंह रायबरेली के थाना
सरैनी के गांव दुधवन के मूल निवासी थे।
कोतवाल के दरवाजा खोलते ही झोंका था फायर
बाग लकूला निवासी पप्पू कोरी ने दरवाजा खोलते ही कोतवाल राजकुमार सिंह पर
फायर झोंक दिया था। कोतवाल को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला था। कोतवाल
हत्याकांड में उसे मृत्यूदंड की सजा मिलने से परिवार के लोगों का बुरा हाल
है। आवास विकास कालोनी निवासी सभासद राकेश गंगवार पर हुए जानलेवा हमले
के आरोपी की तलाश में 29 नवंबर 2014 को शहर कोतवाल राजकुमार सिंह व एसएसआई
हरिश्चंद्र ने पुलिस बल के साथ बाग लकूला निवासी पप्पू कोरी उर्फ
चंद्रकुमार के रिक्शा वाले मकान पर दबिश दी। पुलिस को देख आरोपी ने मकान के
दूसरे गेट से भागने का प्रयास किया। गेट खोलते ही कोतवाल राजकुमार सिंह
दिखाई दिए। पप्पू कोरी ने कोतवाल को गोली मार दी। वह वहीं पर गिर पड़े ।
पप्पू गली का सहारा लेकर भागने लगा। तभी पुलिस कर्मियों ने दौड़कर उसे पकड़
लिया। घायल कोतवाल को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। डाक्टर ने उन्हें
मृत घोषित कर दिया था। एसएसआई हरिश्चंद्र ने पप्पू कोरी उर्फ चंद्र कुमार
के खिलाफ
रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक कोतवाल आरपी यादव ने 23 दिसंबर
2014 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अधीनस्थ न्यायालय से 3 जनवरी को
पत्रावली सत्र न्यायालय को परीक्षण के लिए सुपुर्द कर दी। छह जनवरी को
जिला जज ने आरोप तय किया और 30 मार्च को सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद
उसके परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
बहन की हत्या में पप्पू को हुई थी उम्र कैद
बाग लकूला निवासी पप्पू कोरी को बहन की हत्या में आजीवन कारावास की सजा हो
चुकी है। हाईकोर्ट से अपील पर जमानत मिली थी। जेल से बाहर आने पर उसने
कोतवाल को मौत के घाट उतार दिया था। आरोपी की 21 मुकदमों की क्रिमिनल
हिस्ट्री है। अन्य छोटे-छोटे मामलों में भी सजा हो चुकी है।
वर्ष 1992
में पप्पू कोरी ने अपनी बहन प्रभाकांती की हत्या कर दी थी। इसमें अपर जिला
जज प्रथम ने 10 अगस्त 2007 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने
उच्च न्यायालय में अपील की। वहां से 7 जनवरी 2012 को जमानत मंजूर हुई थी।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मुकदमा 112/1994 में धारा 403, 411 आईपीसी में
सीजेएम ने 23 नवंबर 2012 को जेल में बिताई गई अवधि की सजा से दंडित किया
था। वर्ष 1997 में चाकू में पकड़े जाने में 3 अप्रैल 2011 को जेल में
बिताई
गई अवधि की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया था। वर्ष
2000 में तमंचे में 19 सितंबर 2009 को जेल में बिताई गई अवधि से अपर जिला
जज प्रथम ने दंडित किया था। डकैती, चोरी व अन्य सात मुकदमों में अदालत से
दोषमुक्त हुआ था। अभी भी नौ मुकदमे अदालत में विचाराधीन हैं। पप्पू कोरी
का 21 मुकदमों का क्रिमिनल इतिहास था।
व्यवस्था की हुई थी हत्या
पप्पू
ने कोतवाल राजकुमार सिंह की नहीं बल्कि व्यवस्था की हत्या की थी। हत्यारे
को फांसी की सजा होने से व्यवस्था को न्याय मिला है और कलम की जीत हुई है।
मुकदमे की लगातार सुनवाई हुई और गवाहों को पेश किया गया। गवाह पुलिस के
होने के कारण समय से पेश हुए। इस कारण मुकदमे का निस्तारण शीघ्र हो गया।
पहली बार इतने शीघ्र मुकदमे का निस्तारण हुआ है। -रनवीर सिंह यादव, जिला शासकीय अधिवक्ता
उच्च न्यायालय में की जाएगी अपील
इंस्पेक्टर
हत्याकांड मुकदमे में सुनाई गई मृत्यु दंड की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय
में अपील की जाएगी। पुलिस ने 21 गवाह दिखाए थे लेकिन आधे भी गवाह पेश नहीं
किए। राजेन्द्र सिंह कटियार, आरोपी के अधिवक्ता
एसपी ने प्रतिदिन ली प्रगति रिपोर्ट
इंस्पेक्टर
हत्याकांड मामले का निर्णय आने के बाद पुलिस अधिकारियों में खुशी की लहर
दौड़ गई। इस मुकदमे की पुलिस अधीक्षक प्रति दिन प्रगति रिपोर्ट देते थे।
एसपी ने गवाहों को समय से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया। इसी कारण
व्यवस्था की जीत हुई। - एसएसआई हरिश्चंद्र, मुकदमा वादी
हत्यारे के नहीं आए परिजन
निर्णय
वाले दिन हत्यारोपी पप्पू के परिजन अदालत नहीं आए। दोपहर में निर्णय आने
के बाद आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में सीधे जेल भेज दिया गया। सुनवाई के
दौरान मृतक कोतवाल के परिजन भी मौजूद नहीं थे।
कातिल के चेहरे पर नहीं दिखी शिकन
इंस्पेक्टर हत्याकांड मुकदमे का निस्तारण चार माह में कर दिया गया। जिला
जज की अदालत में निर्णय सुनाए जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में लाए गए
अभियुक्त पप्पू कोरी के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी। एक बार भी ऐसा नहीं
लगा उसे अपने किए पर पश्चाताप है या सजा से डरा हुआ है।
कोतवाल की हत्या से समाज की शांति व्यवस्था हुई थी भंग
शहर कोतवाल हत्याकांड का फैसला सुनाते हुए जिला जज राजन चौधरी ने कहा कि
आरोपी पप्पू शातिर अपराधी है एवं अपराधियों का गैंग चलाता है। उसने एक
इंस्पेक्टर की ड्यूटी के दौरान अवैध अग्नेयास्त्र से फायर कर हत्या की है।
उसके इस कार्य से पूरे समाज की शांति व्यवस्था भंग हो गई। समाज में भय,
रोष, क्रोध व्याप्त हो गया।
जिला जज ने इंस्पेक्टर के हत्यारोपी पप्पू
उर्फ चंद्र कुमार को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए अपने निर्णय में कहा है
कि अपराधी पप्पू ने जब यह हत्या की घटना कारित की तब वह सत्र न्यायालय से
दोषसिद्ध हो चुका था। आजीवन कारावास की सजा पाए था। इसका विस्तृत अपराधिक
इतिहास है। कई मुकदमों में सजा पा चुका है। जब इंस्पेक्टर पकड़ने गए तब
अग्नेयास्त्र से फायर किया। अग्नेयास्त्र होना यह प्रतीत करता है कि वह
बहुत शातिर किस्म का अपराधी है। जो हर समय
अपने साथ अग्नेयास्त्र रखता है।
यह हत्या एक पुलिस इंस्पेक्टर की है। इसलिए यह हत्या पूरे शासन तंत्र की
है। एक ऐसे व्यक्ति की हत्या की गई है जिसकी ड्यूटी कानून व्यवस्था कायम
रखना, अपराधी को पकड़ना एवं शांति व्यवस्था कायम रखना है। उसी व्यक्ति की
हत्या कर पूरे कानून की व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर दिया। आरोपी ऐसी स्थिति
से निपटने के
लिए शुरू से ही तैयार था। यह गंभीर अपराध करने का सक्षम था।
सभी परिस्थितियों को देखते हुए धारा 302 में मृत्युदंड से दंडित किया जाना
न्यायोचित होगा।