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जेलों में बंद माफिया का मोबाइल से चलता नेटवर्क

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अमर उजाला ब्यूरो
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फर्रुखाबाद। जेलाें में मोबाइल से माफिया का नेटवर्क चलता है। यहां की जेलों में जैमर न लगा होने का लाभ माफिया उठाते हैं। पकड़े गए मोबाइलों से पुलिस काल डिटेल खंगालने में जुट गई है। इसके बाद पुलिस माफिया के गुर्गों तक पहुंचने के रास्ते तलाश करेगी। उधर, जिलाधिकारी ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

रविवार को डीएम मोनिका रानी और एसपी अतुल शर्मा ने जिला जेल का निरीक्षण किया था। टीम को बैरकों के अंदर से चार मोबाइल मिले थे। विभागीय अधिकारियों को सेंट्रल जेल में कुछ नहीं मिला। जिला जेल में निरुद्ध बंदियों के मोबाइल सर्विलांस पर लगाकर पुलिस जांच में जुट गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आखिर मोबाइल का इस्तेमाल जेल में कौन-कौन कर रहा था। किस-किस से बात होती थी। जेल में जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद जेल कर्मी कुछ सतर्क नजर आए। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि जेल कार्रवाई की आख्या शासन को भेज दी गई है। वहां के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कर्मचारियों की साठगांठ ही पहुंचते जेल में मोबाइल
फर्रुखाबाद। बागपत जेल में हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेलों की सुरक्षा को लेकर शासन ने कड़े निर्देश दिए। इसके बाद भी जेलों के अंदर मोबाइल मिल रहे हैं। सेंट्रल जेल में तो पूर्वांचल और पश्चिम के माफिया समेत कई सजा काट रहे हैं। जिला जेल में जनपद के ही अपराधी बंद हैं।

जिला जेल में मोबाइल मिलने से यह साफ हो गया है कि जेल कर्मियों की माफिया से साठगांठ है। इसके चलते जेल कर्मियों को तलाशी के बाद भी मोबाइल नहीं मिल पाते थे। मोबाइल से जेल में बंद शातिर अपने गुर्गों से वार्ता कर नेटवर्क चला रहे थे। सेंट्रल जेल में पूर्वांचल का माफिया डान सुभाष ठाकुर, पश्चिम का माफिया सुनील राठी के साथ ही कई सजा काट रहे हैं। माफिया के गुर्गे भी अपने आकाओं के संपर्क में बने रहते हैं।

जेल सूत्रों की मानें तो माफिया तक उनके गुर्गे टिफिन, जूतों के अंदर आदि के माध्यम से जेल कर्मियों की साठगांठ से मोबाइल पहुंचाते हैं। जेल प्रशासन हमेशा अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क बने रहने की बात करता है। इसके बाद भी जेल के अंदर मोबाइल पहुंच रहे तो आखिर कैसे आ रहे हैं।
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जिला जेल के अधीक्षक विजय विक्रम सिंह ने बताया कि मुलाकात के दौरान वह सघन तलाशी करात हैं। इसके साथ भी बैरकों को समय-समय पर चेक किया जाता है। स्टाफ की कमी से तलाशी में दिक्कत आती है। इस लिए उन्होंने डीएम व एसपी को पत्र भेज कर बैरकों की तलाशी के लिए लिखा था। मुलाकात में आने वाले लोगों की तलाशी होती है। शासन के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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