फर्रुखाबाद। मैनपुरी में स्लीपर बस पलटने से 19 लोगों की मौत के बाद शनिवार को राजेपुर क्षेत्र में फिर स्लीपर बस पलट गई। इस हादसे में करीब 35 यात्री घायल हो गए। अवैध तरीके से चल रहीं स्लीपर बसों पर प्रशासन शिकंजा नहीं कस पा रहा है। कागजों में सीट में दर्ज बसों को माफिया स्लीपर बनाकर सड़कों को दौड़ा रहे हैं। शाम होते ही कादरीगेट चौकी के आसपास स्लीपर बसों का बाजार सज जाता है। यहां से सवारियां भरने के बाद बसें दिल्ली, जयपुर समेत अन्य रूट पर रवाना होती हैं।
जुलाई 2018 में जयपुर से फर्रुखाबाद आ रही स्लीपर बस पलट गई थी। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन से अवैध तरीके से चल रही स्लीपर बसों के खिलाफ शिकंजा कसने को छापेमारी अभियान शुरू कराया। तो पता चला कि जिले से दूसरे राज्यों को करीब 90 स्लीपर बसें रोज सवारियां लेकर जाती हैं। अभियान के दौरान करीब 40 बसों को स्लीपर में पंजीकृत किया गया। बस माफिया के सफेदपोशों से संपर्क होने से अभियान को अफसरों ने कुछ दिन चलाने के बाद बंद कर दिया। इससे बस माफिया बेखौफ होकर अवैध स्लीपर बसों का संचालन करने लगे।
करीब 50 बसें जो स्लीपर बन कर दूसरे राज्यों तक फर्राटा भर रही हैं। यह परिवहन कार्यालय के अभिलेखों में सीट में दर्ज हैं। बस माफिया ने इनको अवैध तरीके से स्लीपर बनवा रखा है। इनमें क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाया जाता है। शाम होते ही कादरीगेट चौकी के आसपास स्लीपर बसों का बाजार सज जाता है। यहां रात नौ बजे तक स्लीपर बसें आती रहती हैं। जो सवारियों को लेकर दूसरे राज्यों को रवाना होती हैं। इन बसों को चलवाने वालों के खिलाफ प्रशासन और परिवहन निगम के अफसर कोई कार्रवाई नहीं रहे हैं।
रोडवेज बस अड्डे से चंद दूरी पर सजते ट्रैवल्स एजेंसी के काउंटर
शहर स्थित रोडवेज बस अड्डे से एक किलोमीटर दूरी तक प्राइवेट बसों के खड़े होने और सवारियों को भरने पर शासन ने रोक लगाई हैं। इसका आदेश भी जिला मुख्यालय आया था। यह आदेश बस माफिया के आगे बेअसर साबित हो रहा है। लाल दरवाजे पर रोडवेज बस अड्डा है। यहां से कादरीगेट चौकी करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर है। कादरीगेट चौकी और लालदरवाजे के बीच एक दर्जन से अधिक ट्रैवल्स एजेंसियां खुली हैं। इनके शाम होते ही काउंटर लग जाते हैं। स्लीपर बसें शाम होते ही यहां आकर खड़ी हो जाती हैं और सवारियां को भरकर रवाना होती हैं। कुछ बसें तो बस स्टैंड के सामने ही सवारियां भरती रहती हैं।
करीब 40 बसें स्लीपर और 90 बसें सीट में पंजीकृत हैं। स्लीपर बसों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। जो बस राजेपुर में पलटी है। वह पंजीकृत है या नहीं, इसकी भी जांच कराई जाएगी। - मोहम्मद हसीब, एआरटीओ प्रशासन