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अपहरण के बाद हत्या में सात को उम्रकैद

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ृयिराम के हत्यारों को सजा मिलने पर घर में खुशी में एक साथ खड़े परिजन। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश महेंद्र सिंह ने 32 साल पुराने अपहरण और हत्या के मुकदमे में सात बदमाशों को दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है।
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मेरापुर थानाक्षेत्र के गांव पहरापुर निवासी रामऔतार शाक्य 25 मई 1990 की रात करीब नौ बजे खेत से घर आ रहे थे। रास्ते में असलहा और लाठी लिए बदमाशों ने रामऔतार को घेर लिया। उनको मारते-पीटते भाई सियाराम के दरवाजे पर लाए। रामऔतार से आवाज लगवाकर सियाराम को घर के बाहर बुलवाया। घर से निकलते ही बदमाशों ने सियाराम को भी लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया।
यह देखकर रामऔतार ने शोर मचाया तो सियाराम का पुत्र विशंभर दयाल व परिवार के अन्य लोग आ गए। गांव के लोग भी निकल आए और बदमाशों का विरोध करने लगे। यह देखकर बदमाशों ने फायरिंग की। छर्रा लगने से गांव का रहना वाला विनोद कुमार घायल हो गया था। बदमाश सियाराम को अपने साथ ले गए थे। पुत्र विशंभर दयाल ने 10-11 अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मेरापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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करीब 20 दिन बाद गुसलपुरा गांव के नजदीक काली नदी के पास सियाराम का सिर पड़ा मिला। वहीं पर सियाराम का अंडरवियर भी पड़ा था। पुलिस ने सियाराम के शव को बरामद करने का काफी प्रयास किया, लेकिन मिला नहीं।
पुलिस ने विवेचना के बाद मेरापुर के गांव बरखिरिया निवासी चंपत, सुघर सिंह, गांव नगला लाहोरी निवासी पप्पू, इंस्पेक्टर, बृजनंदन, एटा जिले के थाना जैथरा के गांव केसरपुर निवासी जगदीश, कुंवरपाल, रामभजन उर्फ भजनू उर्फ भजन लाल, राज बहादुर और औसान के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बदमाश चंपत, कुंवरपाल व औसान की मौत हो गई। सात बदमाशों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला।
बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरनाथ सिंह, केके पांडेय, अखिलेश कुमार ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने मंगलवार को बदमाश सुघर सिंह, पप्पू, इंस्पेक्टर, बृजनंदन, जगदीश, रामभजन उर्फ भजनू और राजबहादुर को अपहरण कर हत्या करने, साक्ष्य मिटाने व हमला करने के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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देर से भले आया फैसला पर न्याय मिला
मेरापुर क्षेत्र के गांव पहरापुर निवासी विशंभर दयाल ने कहा कि देर से भले ही फैसला आया पर न्याय मिला है। पिता सियाराम का बदमाशों ने 25 मई 1990 की रात में घर के बाहर से अपहरण कर लिया था। पिता का सिर तो मिल गया था, लेकिन आज तक धड़ बरामद नहीं हुआ है। चार भाइयों में वह दूसरे नंबर का है। न्याय के लिए वह लगातार 32 साल से मुकदमा लड़ रहा था। बदमाशों को सजा मिलने से उनको न्याय मिल गया है। इससे वह, उसके भाई व परिवार के लोग खुश हैं। वह और उसके भाई खेती करके जीवन यापन करते हैं।
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