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कोर्ट ने डॉक्टर को सुनाई तीन माह की सजा

Sun, 28 Feb 2016 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सैफ अहमद ने अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक डॉक्टर को धारा 25 गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम में दोषी पाते हुए तीन माह की सजा सुनाई है। साथ ही  एक हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में 15 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है।
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फतेहगढ़ के मोहल्ला दालमंडी में मुख्य मार्ग पर सूरज अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित है, इसके संचालक डा. राजीव पाठक हैं। सात अगस्त 2014 को अपर जिलाधिकारी मनोज कुमार सिंघल ने तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट महमूद आलम और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजवीर सिंह के साथ छापा मारा था। सेंटर के निरीक्षण में टीम को केंद्र पर गर्भवती महिलाओं के प्रसव पूर्ण निदान परीक्षणों के पूर्व भरे जाने वाले प्रपत्र एफ अपूर्ण मिले। अल्ट्रा सोनोग्राफी रजिस्टर पूर्ण नहीं था।

टीम ने जांच कर डीएम को रिपोर्ट भेजी। डीएम ने सेंटर प्रभारी को नोटिस जारी किया। 18 सितंबर 2014 को अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक ने नोटिस का जवाब दिया। पीसीपीएनडीटी की जनपदीय सलाहकार समिति केंद्र संचालक के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। डीएम ने 15 अक्तूबर 2014 को अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस निलंबित कर मशीन सील करने का आदेश दिया। टीम ने 17 अक्तूबर को सेंटर पर पहुंचकर मशीन और अभिलेखों को सील किया। 24 नवंबर 2014 को टीम ने दोबारा से सेंटर पर छापा मारा तो सील अल्ट्रासाउंड मशीन तथा दो अन्य मशीनें बिना लाइसेंस के चलते मिलीं। टीम ने मशीनों समेत कक्ष को सील कर दिया। इसकी रिपोर्ट डीएम को दी गई।
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डीएम के आदेश पर एसीएमओ डा. राजवीर सिंह ने न्यायालय में वाद दायर किया। परिवादी और गवाहों के बयान के बाद आरोपी डा. राजीव पाठक को तलब किया। एसीजेएम ने सूरज अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक डा. पाठक को धारा 25 गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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