फर्रुखाबाद। चोरी के 32 वर्ष पुराने मामले में सीजेएम की अदालत ने दो को दोषी ठहराया। परिस्थितियों के आधार पर दोनों को दो वर्ष तक सदाचार परिवीक्षा की सजा सुनाई।
दो वर्ष तक शांति बनाए रखने के साथ ही अपराध न करने की शर्त पर अदालत से रिहा कर दिया गया। दोषी माखन लाल व रामचंद्र को दो वर्षों तक प्रत्येक माह जिला प्राेबेशन अधिकारी कार्यालय में जाकर अपनी हाजिरी देनी पड़ेगी।
थाना राजेपुर के गांव सतरा निवासी सरूपे के मकान में दो अगस्त 1993 को चोरी हो गई थी। पीड़ित ने गांव के ही माखन लाल और रामानंद के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत में 32 वर्षों तक मामले की सुनवाई होती रही।
सुनवाई पूरी करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट घनश्याम शुक्ला ने दोनों को दोषी करार दिया। दोष सिद्ध की सजा स्थगित रखते हुए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए दो वर्ष की अवधि के लिए सदाचार की परिवीक्षा पर सशर्त रिहाई देने के आदेश दिए।
दोनों को 20 हजार रुपये की दो प्रतिभू एवं इसी धनराशि का निजी बंधपत्र जिला प्रोबेशन अधिकारी को 15 दिन के अंदर देना होगा। माखन लाल व रामचंद्र को परिवीक्षा अवधि में शांति बनाए रखने और अपराध न करने के आदेश दिए। शर्तों का उल्लंघन करने पर सजा भोगने के लिए न्यायालय में उपस्थित होना होगा।