फोटो-8 मौधा गांव में निर्माणाधीन पानी की टंकी। संवाद
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मोहम्मदाबाद/शमसाबाद। केंद्र सरकार की हर घर जल योजना में कागजी खानापूर्ति की जा रही है। गांवों में बन रहीं अधिकांश पानी की टंकियां दो साल से अधूरी पड़ी हैं। जबकि कागजों में सभी घरों में पानी पहुंच रहा है। सच यह है कि लगाए गए सोलर नलकूप दिन के वक्त पाइप लाइनों में चला दिए जाते हैं। इनसे चंद दूरी तक घरों के दरवाजों पर लगे पाइप लाइनों में पानी टपकता रहता है। इसका आम जनता को कोई फायदा नहीं मिल रहा। जबकि सरकारी दस्तावेज पेयजल योजना का लाभ मिलना दर्शा रहे हैं। सच समझने के लिए दो गांवों की पड़ताल में सच सामने आ गया।
केस-एक: मोहम्मदाबाद ब्लॉक
मौधा गांव में दो साल से निर्माणाधीन टंकी अधूरी पड़ी है। पांच मजरों में से महज दो में सबमर्सिबल पंप से सीधे आपूर्ति की जा रही है। पाइप लाइन से कुछ घरों तक ही आपूर्ति हो पाती है। क्षेत्र में कुछ टंकियां बनकर तैयार हैं, लेकिन आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। कई जगह पाइपलाइन लीकेज से सप्लाई बाधित है, ग्रामीण पानी को तरस रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की किल्लत शुरू होने लगी है। ग्रामीणों ने पानी की सप्लाई जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग की है।
केस-दो: शमसाबाद क्षेत्र
कुंइयाधीर गांव में दो साल पहले शुरू हुआ टंकी निर्माण का निर्माण आज भी अधूरा है। जलापूर्ति शुरू न होने से लोग शुद्ध पानी के लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र में कई अन्य टंकियों का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने गांवों में पाइपलाइनें डालने के लिए खोदी गई सड़कों की एक माह में मरम्मत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। विभागीय अधिकारी 80 फीसदी गलियों की मरम्मत होने का दावा कर रहे हैं। शेष कार्य भी जल्द पूरा होगा। टंकियों का कार्य एक माह में पूरा कर जलापूर्ति शुरू कराई जाएगी।
वर्जन
जल्द ही दोनों गांवों में काम शुरू कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। -सजन कुमार, अधिशासी अभियंता
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