फोटो-19, कमालगंज के महमदगंज मड़ैयन घाट पर मोटरवोट से बाइक उतारते लोग। संवाद
कमालगंज। गंगा में फिर से जलस्तर बढ़ने व कटान के चलते पांटून पुल बनने में देरी से लोग परेशान हैं। स्थानीय शीतगृहों से खेतों में आलू की गड़ाई के लिए किसानों को 38 किलोमीटर चक्कर लगाना पड़ रहा है।
गंगापार क्षेत्र में आलू ले जाने वाले किसान इससे काफी परेशान हैं। कमालगंज के महमदगंज मड़ैयन घाट पर दिवाली के बाद पांटून पुल बांधने का काम शुरू कर चालू कर दिया जाता है, लेकिन इस बार जलस्तर फिर से बढ़ गया, गंगा कटान भी कर रही हैं।
इससे अन्य लोगों के साथ किसानों में भी मायूसी है। गंगापार के खुटिया निवासी राधाकृष्ण त्रिवेदी ने बताया कि इस समय गंगा नदी की चौड़ाई बहुत बढ़ी हुई है। जलस्तर ज्यादा घटेगा तो भी पांटून पुल बनाने का काम शुरू होने लायक पानी घटने में 10 से 15 दिन लग सकते हैं।
गंगापार तेरा अकबरपुर के मनोहर ने बताया कि उन्होंने कमालगंज के शीतगृह में छट्ठा आलू व बीज का भंडारण किया था। अब शीतगृह से आलू लेकर जाना है। पहले पांटून पुल होते हुए कमालगंज की दूरी सात किलोमीटर पड़ी थी। अब पांचालघाट फर्रुखाबाद होकर आलू ले जाना पड़ेगा। इस रास्ते से दूरी 45 किलोमीटर है, यानी 38 किलोमीटर दूरी ज्यादा पड़ है।
इस समय निजी मोटरबोट सहारा बनी है। मोटसाइकिल को मोटरबोट पर लाद कर भी लोग पार उतर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर मोटरबोट रुकती है, वहां की मिट्टी भी कभी-कभी धंस जाती है, इससे किसान परेशान हो रहे हैं।