शीतगृह में आलू भंडारण के नाम पर किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। जिले में 64 शीतगृहों में से अधिकांश आलू क्षमता के अनुसार भंडारित हो चुके हैं। कुछ शीतगृहों में जो जगह रिक्त है। उसके लिए शीतगृह मालिकों ने अपना-अपना बारदाना किसानों को बांट रखा है। नतीजतन जिले के 30 फीसदी आलू किसानों को मजबूरी में मंडी में आलू बेचना पड़ेगा।
जिले में इस वर्ष 39 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की गई है। इसमें शुद्ध पैदावार 12 लाख मीट्रिक टन हुई। जिले में 64 शीतगृहों में आलू भंडारण की क्षमता मात्र छह लाख मीट्रिक टन है। जहानगंज में केवल सात शीतगृह हैं। इन शीतगृहों में भंडारण लगभग पूरा हो चुका है। स्वामी रामाधार शीतगृह जहानगंज के मालिक मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि केवल याकूब शीतगृह में दस फीसदी भंडारण नहीं हुआ है।
इसके लिए बोरे बांटे जा चुके हैं। मोहम्मदाबाद स्थित दुबे कोल्ड स्टोरेज के मालिक हरीश दुबे उर्फ टुनटुन का कहना है कि यहां पांच कोल्ड स्टोरेज हैं। जो कि पूरी तरह से भंडारित हो गए हैं। कसबा में मौजूद शीतगृहों में भंडारण पूरा हो जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्र का किसान शहरी क्षेत्र में बनाए गए शीतगृह में भंडारित करने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इन शीतगृहों में उन्हीं किसानों का आलू भंडारित किया जाता है, जिन्होंने लोन लेकर या शीतगृह मालिक से बारदाना लेकर पहले से ही बुकिंग करा ली है।
बेवर रोड स्थित सावित्री कोल्ड स्टोरेज का दरवाजा अधिक आलू अंदर पहुंच जाने के कारण बंद कर दिया गया है। किसान अपने ट्रैक्टरों को लेकर शीतगृह के बाहर लाइन लगाए खड़े हैं। शीतगृह के मालिक सुरजीत कटियार का कहना है कि उनके शीतगृह में भंडारण क्षमता एक लाख 70 हजार पैकेट की है। एक लाख पैकेट भंडारित किया जा चुका है। 70 हजार पैकेट के आसपास आलू और भंडारित किया जाना है।
इसमें किसानों को बारदाना भी दिया जा चुका है। यहां आलू भंडारित करने आए अश्वनी कुमार दुबे निवासी रैसेपुर का कहना है कि उनके पास अभी 800 पैकेट आलू शीतगृह में भंडारित करने के लिए रखा है। यही कहना फतनपुर के इंद्रेश, राकेश कुमार, ब्रजेश और मिल्किया के मुनीम का है। यह लोग सुबह तड़के से आलू भंडारित करने के लिए शीतगृह का दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन दरवाजा पूरी तरह से बंद है।
कायमगंज व कमालगंज में 40 फीसदी शीतगृह खाली
कमालगंज और कायमगंज के शीतगृहों में तकरीबन 40 फीसदी भंडारण क्षमता बाकी बची है। 60 फीसदी आलू भंडारित हो गया है। कमालगंज के सीएस कोल्ड स्टोरेज के मालिक धर्मेंद्र सिंह, एचएम के बारिश हयात और अर्जुन सिंह कोल्ड स्टोरेज के मालिक सतेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि यहां 40 फीसदी आलू और भंडारित करना शीतगृहों में शेष बचा है।
जिला आलू विकास अधिकारी, नेपाल राम का कहना है कि आलू के भाव अच्छे होने के कारण जो आलू बचा है। वह मंडी में बिक जाएगा। किसानों को अब आलू में घाटा नहीं खाना पड़ेगा। कितना आलू किस शीतगृह में भंडारित है। इसकी जांच भी कराई जाएगी।