कलेक्ट्रेट सभागार में विद्यालय प्रबंधन समिति की खुली बैठक में डीएम ने जिला समन्वयकों की ‘क्लास’ ली। विभाग से संबंधित प्रश्नों के जवाब देने में समन्वयक ‘फेल’ हो गए। आधी-अधूरी जानकारी होने के चलते जिलाधिकारी ने जिला समन्वयकों को जमकर फटकारा।
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला समिति की बैठक में अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी कर्ण सिंह चौहान ने जिला समन्वयक समेकित शिक्षा राजेश वर्मा से पूछा कि उनके क्षेत्र में कितने बच्चे विकलांग हैं और कक्षा 8 की परीक्षा कितने बच्चों ने पास की है। इसकी उन्होंने सही जानकारी दे दी। जब डीएम ने राजेश वर्मा से पूछा कि सर्वाधिक विकलांग बच्चे किस विद्यालय में हैं।
इसका वह जवाब नहीं दे सके। जिला समन्वयक अनिल शर्मा से उनकी मूल पोस्टिंग के बारे में जानकारी की। इसके बाद डीएम ने अनिल शर्मा से कहा कि पहले वह अपने मूल विद्यालय में जाकर शिक्षण कार्य करें। इसके बाद कोई अन्य कार्य करें। डीएम ने अनिल शर्मा से पूछा कि 500 के नोट में किन-किन लोगों के हस्ताक्षर होते हैं तो वह नहीं बता सके।
जिला समन्वयक निर्माण दिलीप राजपूत से डीएम ने पूछा कि पिछले वर्ष कितने विद्यालयों का निर्माण कराया गया था और मौजूदा समय में कितने विद्यालय बनने के लिए प्रस्तावित हैं। जिला समन्वयक पिछले वर्ष के निर्माणाधीन विद्यालयों की जानकारी नहीं दे सके। दिलीप राजपूत मेजरमेंट बुक की जानकारी भी नहीं दे सके।
इस पर डीएम ने जिला समन्वयक निर्माण दिलीप राजपूत की फटकार लगाई और निर्देश दिए कि अपने कार्यों को ईमानदारी से करें। डीएम ने कहा कि बच्चों के लिए जो योजनाएं चल रही हैं। उसका उन्हें शत-प्रतिशत लाभ दिया जाए। कहा कि प्रत्येक तीन माह में विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक हो। डीएम ने सभी बीईओ को निर्देश दिए कि बीडीओ से मिलकर ड्यूटी चार्ट बनवाएं।
इस अवसर पर सीडीओ नरेंद्र प्रसाद पांडेय, बीएसए संदीप चौधरी, बीईओ सुमित कुमार, ललित कुमार, संजय पटेल, डीसी बालिका शिक्षा ऋचा यादव और एबीआरसी प्रदीप यादव आदि मौजूद रहे।