सुबह फैसला आने से पहले धर्मगुरु ज्ञानी गुरुबचन सिंह, पप्पन मियां, ब्रह्मण समाज के नेता अरूण प्रका
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फर्रुखाबाद। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का धर्म गुरुओं ने स्वागत किया। कहा कि निष्पक्ष फैसले ने किसी को निराश नहीं किया। एक ओर आस्था से जुड़ी रामलला की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण, तो दूसरी ओर मस्जिद निर्माण को पांच एकड़ भूमि दिए जाने से दोनों पक्ष संतुष्ट हैं।
ब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ ने कहा कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्पक्ष होने के साथ स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि जिले के लोग फैसले की सराहना करते हैं। अदालत ने हिंदू-मुस्लिम को एक मानकर राम जन्मभूमि पर लोगों की आस्था देखी, इसलिए वह भूमि राम मंदिर बनाने के लिए दे दी। इसके बाद मुस्लिम भाइयों को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि दे दी। यह हिंदू-मुस्लिम एकता को बरकरार रखने के लिए यह निर्णय लिया है। उन्होंने सभी से फैसले को सिरोधार्य करने की भी अपील की। सूफी संत पप्पन मियां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा रहा। इससे इंसानियत बच गई। इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं। मुल्क में अमन-शांति बरकरार रहे। वहीं सिख धर्म गुरु ज्ञानी गुरुवचन सिंह ने कहा कि स्वागत योग्य इस फैसले को सभी को मानना है। इस फैसले से वह खुश हैं। बढ़पुर चर्च के पादरी जयपाल मैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वह सभी को मान्य है। इससे सबको शांति बनाए रखने की जरूरत है।
फैसले से पूर्व शहर में भ्रमण कर शांति रखने की अपील
सुप्रीम कोर्ट का फैसला होने से पूर्व ब्राह्मण समाज के नेता अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, सूफी संत पप्पन मियां व ज्ञानी गुरुवचन सिंह हाथों में तिरंगा लेकर शहर में भ्रमण किया। उनके साथ संदीप शर्मा, आकाश मिश्रा भी तिरंगा थामे थे। सभी ने लोगों से हाथ जोड़कर शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं लोगों ने भी उनकी बात का समर्थन किया।