गणना पूरी होने से पहले ही बाहर जातीं पूर्व ब्लाक प्रमुख उर्मिला राजपूत उर्फ अलका।
- फोटो : amarujala
फर्रुखाबाद। बढ़पुर ब्लाक प्रमुख उर्मिला राजपूत उर्फ अलका की कुर्सी चली गई है। उनके खिलाफ बीडीसी रीता यादव द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार को हुए मतदान में 58 सदस्यों ने मुहर लगाई, जबकि दो ने ब्लाक प्रमुख के पक्ष में मतदान किया। ब्लाक के 82 सदस्यों में सिर्फ 60 ने ही मतदान में हिस्सा लिया।
खास बात यह रही कि इस अविश्वास प्रस्ताव में भाजपा पर्दे के पीछे रही। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली रीता यादव पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं सपा नेता यशपाल सिंह की पत्नी हैं। यशपाल पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के दाहिने हाथ माने जाते हैं। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में बढ़पुर ब्लाक से ज्यादातर बीडीसी सदस्य सपा के जीते।
ब्लाक प्रमुख पद महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से राजा नगला निवासी सपा नेता एवं तत्कालीन ब्लाक प्रमुख यशपाल सिंह यादव ने अपनी पत्नी बीडीसी रीता यादव को मैदान में उतारा। सपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के खास माने जाने वाले यशपाल को मात देने के लिए राजेपुर के ब्लाक प्रमुख डा. सुबोध यादव ने पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत की बहू उर्मिला उर्फ अलका को समर्थन दे दिया।
सपा के दो नेताओं के बीच चले संघर्ष के बीच रीता यादव ने नाम वापस ले लिया और उर्मिला राजपूत निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुन ली गईं। प्रदेश से सपा की सत्ता जाने के बाद पूर्व ब्लाक प्रमुख यशपाल सिंह यादव ने हिसाब बराबर करने की रणनीति बनाई। उनकी पत्नी बीडीसी सदस्य रीता यादव ने 67 बीडीसी सदस्यों के हस्ताक्षर कराकर ब्लाक प्रमुख उर्मिला राजपूत के खिलाफ डीएम को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा।
इस पर बढ़पुर विकास खंड कार्यालय में बुधवार को निर्वाचन अधिकारी एसडीएम सदर रमेशचंद्र की मौजूदगी में सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक प्रस्ताव पर चर्चा हुई। जब सभी सदस्य मतदान के लिए सहमत हो गए तो 1:10 बजे मतदान शुरू हुआ। ब्लाक के कुल 82 सदस्यों में 60 ने मतदान में हिस्सा लिया। इसमें 31 महिला और 29 पुरुष बीडीसी सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना में 58 मत ब्लाक प्रमुख उर्मिला राजपूत के विरोध और दो मत उनके पक्ष में पड़े।