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Farrukhabad News: चीनी मांझे से खतरे में जान, जिम्मेदार अनजान

Mon, 01 Dec 2025 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो-22 शहर में खुली पतंग और मांझा की दुकान। संवाद
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फर्रुखाबाद। शहर में धड़ल्ले से बिक रहा चीन का मांझा राहगीरों के लिए जानलेवा बन रहा है और जिम्मेदार अनजान बने हैं। अधिकारी वसंत पंचमी पर्व के आसपास चीनी मांझा बेचने वालों की धड़पकड़ की खानापूरी करते हैं।
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शहर में शुक्रवार को भी एक युवक की गर्दन कट गई। गनीमत रही कि उसकी जान बच गई। इससे पहले भी कई लोग घायल हो चुके हैं। शहर में बरेली के रास्ते भारी मात्रा में चीनी मांझे का भंडारण किया जा रहा है। हजारों युवा पतंगबाजी कर रहे हैं।
वहीं, कई चीनी मांझे से पतंग उड़ा रहे। ऐसे में पतंग कटने के बाद सड़कों और छतों पर लोगों के शरीर में मांझा फंसकर घाव कर देता है। पक्षियों के पंख भी कट रहे हैं। इसके बाद भी चीनी मांझा बेचने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ वसंत पंचमी पर्व के दौरान कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर देते हैं।
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केस-एक
बच्ची को लगे थे टांके
शहर के मोहल्ला दाउद खां निवासी तस्लीम की चार वर्षीय पुत्री आफिया कुछ माह पहले घर से मोमोज खाने जा रही थी। तभी समय उसके गले में चीन का माझा फंस गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती करवाकर टांके लगवाए।

केस-दो
कारीगर का पैर कट गया
मोहल्ला दाउद खां निवासी सगीर खां का होटल है। उनके यहां हरदोई के गांव मटियामऊ निवासी नवीशेर रोटी बनाने का कारीगर है। पिछली साल दोनों बाजार जा रहे थे। तभी मांझा फंसने से सगीर की चमड़े की चप्पल कट गई और नवीशेर का पैर कट गया। इससे कई टांके आए थे।

केस-तीन
राहगीर की नाक कटी
शहर के मोहल्ला गढ़ी मुकीम खां निवासी शोएब करीब सात माह पहले पक्कापुल से घर जा रहे थे। बाइक पर जाते समय अचानक नाक पर मांझा टकरा गया। जब तक बाइक रोकी, तब तक उसकी काफी नाक कट गई। बमुश्किल इलाज के बाद सही हो सका।


केस-चार
सात टांके लगवाने पड़े
हरदोई के शाहबाद निवासी उमेश शर्मा (26) शुक्रवार शाम कादरीगेट थाने के गांव अमेठी जदीद निवासी बहनोई दीपक शर्मा के घर आए थे। वह किसी काम से कादरीगेट की तरफ आ रहे थे। तभी मांझा से उसकी गर्दन कट गई। अस्पताल में सात टांके लगवाए गए। बहनोई दीपक ने तहरीर दी, मगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।

कैसे बनाया जाता है चीन का मांझा
शहर में चीनी मांझा बनाने वाले बुजुर्ग ने बताया कि देसी मांझा शरीर के लिए घातक नहीं होता। चीनी माझा प्लास्टिक अथवा अन्य मजबूत धागों से तैयार होता है। यह सामान्य धागों से नहीं बनता। इसमें नायलॉन और मैटेलिक पाउडर का प्रयोग होता है। यह मांझा प्लास्टिक की तरह लगता है। इसे खींचते हैं तो यह टूटने की बजाय बढ़ जाता है। इसे काटना भी मुश्किल है। इस मांझे पर कांच या लोहे के चूरे से धार लगाई जाती है। इससे यह और अधिक घातक हो जाता है। इस मांझे से पतंग उड़ाई जाती है, तो इसमें अलग तरह का कंपन भी होता है।
शाहजहांपुर में जा चुकी सिपाही की जान
पिछले महीने ड्यूटी पर जाते समय शाहजहांपुर के सिपाही शाहरुख हसन (30) की चीन के मांझा से गर्दन कट गई थी। इससे उसकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। उसकी अभियोजन सेल में तैनात थी।
मांझा भरे कई सूटकेस और पतंगें जब्त
पांचाल घाट स्थित रामनगरिया स्थल पर रविवार सुबह से ही अलग ग्रुपों में 15-20 युवक पतंगबाजी करने पहुंचे। रविवार दोपहर में वहां से निगले पांचाल घाट चौकी प्रभारी मोहित मिश्रा की नजर पड़ी तो उन्हें हिदायत देकर भगा दिया। शाम के समय जब एएसपी अरुण कुमार कुमार पहुंचे तो फिर पतंगबाजी होती दिखी। इस पर पुलिस ने घेराबंदी करके 10 से अधिक सूटकेस भरा मांझा, सैकड़ों पतंगों को भी जब्त कर लिया। हिदायत देकर युवाओं को भगा दिया।
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-चीनी मांझे की बिक्री सख्ती से रोकी जाएगी। शुक्रवार को हुई घटना की जानकारी नहीं है। कोई शिकायत मिली होगी, तो जांच करवा कर कार्रवाई करूंगा।
-अरुण कुमार, एएसपी, फर्रुखाबाद।

फोटो-22 शहर में खुली पतंग और मांझा की दुकान। संवाद

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