शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव कलुआपुर सानी में साढ़े आठ माह की बच्ची की सिर फटने से मौत हो गई। ऑपरेशन से पैदा हुई इस बच्ची का सिर जन्म से ही बहुत बड़ा था। परिवार वालों ने इसका महानगरों के अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
बालिका साक्षी शर्मा के पिता राजीव शर्मा का कहना है कि 8 माह 26 दिन पहले उसकी पत्नी प्रभाकांती ने फर्रुखाबाद के एक निजी नर्सिंग होम में बालिका को जन्म दिया था। बालिका का सिर बहुत बड़ा था। वह उसे बल्लभगड़ सरकारी अस्पताल में ले गया जहां डाक्टरों ने उसे दिल्ली ले जाने की सलाह दी। उसका कहना है कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह बालिका को दिल्ली नहीं ले जा सका। बताया कि एक अप्रैल को एकाएक उसका सिर बीच से फट गया और उसमें से पानी निकलने लगा। यह जानकारी होते ही दूर-दूर के लोग बालिका को देखने पहुंचने लगे।
इस संबंध में जाने माने फिजीशियन पूर्व उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केएम द्विवेदी का कहना है कि यह वॉटरहाइड्रो नामक बीमारी होती है। इस बीमारी मे हड्डी और त्वचा के बीच पानी आ जाता है। दिमाग से इसका कोई लेना देना नहीं होता है। वह पानी बढ़ता चला जाता है। यदि ऑपरेशन से पानी निकाल दिया जाए तो फिर पानी बन जाता है।
इस वजह से चिकित्सक ऑपरेशन के बाद नली डाल देते हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी का उपचार केवल ऑपरेशन है और ऑपरेशन के बाद बहुत कम बच्चे जीवित रह पाते हैं। डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल के पूर्व वरिष्ठ सर्जन डा. अनल शुक्ला भी इस बात को स्वीकार करते हैं। वह कहते हैं कि ऐसे बच्चे मानसिक तौर पर तो कमजोर होते ही हैं उनके पैर भी कमजोर हो जाते हैं। वह चल फिर नहीं पाते। बहुत कम उम्र जीते हैं। उनका कहना है कि यह सिर फटने की घटना नहीं है, बल्कि हड्डी के ऊपर खाल और हड्डी के बीच में भरा पानी फटकर निकल गया है। यह क्रम जारी रहेगा। पानी बनता और निकलता रहेगा।