फर्रुखाबाद। मकर संक्रांति से सर्दी की अच्छी शुरुआत होने से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। शनिवार को मौसम सर्द रहा। पूरे दिन गलन रही। इससे गेहूं को फायदा मिलने की उम्मीद हैं।
चढ़े तापमान से किसानों को पैदावार में गिरावट का डर था। अभी तक के ऊंचे तापमान से सात से आठ फीसदी उत्पादन में गिरावट की आशंका बनी हुई है। मौसम में ठंडक बरकरार रही तो बाकी की फसल बच जाएगी। शुक्रवार को यह तापमान छह डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
गेहूं के लिए रात में तकरीबन पांच डिग्री सेल्सियस और दिन में 15 से 18 डिग्र्री सेल्सियस मुफीद है। गेहूं के साथ ही सरसों और आलू में भी गिर रहे तापमान से फायदे की उम्मीद हैं।
गेहूं
जिले में 77468 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई होती है। दिसंबर से मौसम सर्द रहने लगता था। इस बार 15 जनवरी से सर्दी शुरू हुई है। बदले मौसम से गेहूं के बढ़ने में फायदा होगा। इससे उपज भी ठीक मिलेगी।
सरसों
इस बार 24115 हेक्टेयर में सरसाें की बुवाई की गई है। सरसों में दाना बन रहा है। ऊंचे तापमान से सरसों में माऊं का खतरा था। यह टल गया है। इससे उत्पादन भी बेहतर मिलेगा।
तंबाकू
जिले में तंबाकू का रकबा 5719 हेक्टेयर है। सर्दी से तंबाकू में भी नुकसान की आशंका नहीं है। इससे तंबाकू किसानों ने भी राहत की सांस ली है।
आलू
जिले में 26000 हेक्टेयर में आलू की बुवाई हुई है। गर्मी से आलू फटने लगा था। चेचक की शिकायतें भी आ रही थीं। आलू पक ने की स्थिति में है। इससे बदले मौसम से आलू को फायदा होगा। पूरे दिन कोहरा पड़ा तो झुलसा लग सकता है।
बदला मौसम रबी की फसलाें के लिए मुफीद है। गेहूं के लिए मौसम में बदलाव जरूरी था। तापमान न गिरता तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ताजा हालातों में सभी फसलाें को फायदा होगा। - डा. जगदीश किशोर, कृषि वैज्ञानिक