फर्रुखाबाद/कमालगंज। शीतगृहों से किसानों के पास मशीन बंद होने के लिए फोन आने लगे हैं। उन्हें तुरंत आलू निकाल ले जाने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। वहीं आलू के भाव में रिकॉर्ड मंदी से खरीदारों का टोटा पड़ गया है। ऐसे में मशीनें बंद होने के बाद शीतगृहों से आलू फेंके जाने जैसी नौबत की आहट से किसान परेशान हैं।
शीतगृहों से किसानों को मोबाइल फोन पर सूचना दी जा रही है कि 30 नवंबर को पूरी तरह मशीनें बंद हो जाएंगी। इसलिए भाड़ा व बारदाने का पैसा जमा कर अपना आलू छुड़ा ले जाएं। वहीं आलू के भाव गिरने से माल भी नहीं बिक रहा। किसानों का कहना है कि सफेद आलू ख्याती व पुखराज का 50 किलो पैकेट 200 रुपये में बिक रहा है। वहीं, चिपसोना 300 से 350 रुपये पैकेट है। लाल आलू हालैंड भी 350 रुपये पैकेट है। इस समय जो आलू निकल रहा, उसकी छंटाई में 20 प्रतिशत तक खराब आलू कटा-सड़ा निकल जा रहा है।
आलू व्यापारी इशरत खां का कहना है कि जब भाव ठीक थे तो व्यापारी किसानों का इंतजार करते रहते थे। किसानों ने और भाव बढ़ने की उम्मीदें पालकर आलू रोके रखा, लेकिन अब बाजार में मांग से कई गुना आलू है। इसलिए भाव गिरे हैं और खरीदार भी कम है। सराय के किसान श्रीराम ने कहा कि नवंबर में शीतगृहों में घंटे-दो घंटे मशीन चलाते रहे। अब पूरी तरह मशीनें बंद हुईं तो आलू निकालना ही पड़ेगा।
-
भाड़ा व बारदाना का ही पैसा निकल आए
कमालगंज के एक शीतगृह में आलू बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे ईसापुर निवासी किसान फरीद हुसैन ने बताया कि उनका 85 पैकेट आलू शीतगृह में है। वह चाहते हैं कि शीतगृह का भाड़ा, बारदाना ही निकल आए। ज्यादा दिन रुके तो कहीं, फिंकने जैसे हालात न बन जाएं।
-
नया आलू भी बिगाड़ रहा गणित
व्यापारी रामकृपाल का कहना है कि नया आलू भी पुराने का गणित बिगाड़ रहा। पंजाब व हिमाचल का नया आलू महीने भर से बाहर की मंडियों में बिक रहा है। अब अपने यहां का नया भी आने लगा। वहीं सातनपुर मंडी में स्थानीय नया आलू रोज 500 पैकेट के करीब पहुंच रहा।
-
शीतगृहों में अभी 50 हजार मीट्रिक टन आलू, बढ़ सकता है समय
जिले के 109 शीतगृहों में भंडारित 7 लाख 14 हजार 1 सौ 92 मीट्रिक टन आलू में से अभी 50 हजार मीट्रिक आलू शेष है। जिला उद्यान एवं आलू विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि शीतगृहों में अधिक आलू बचे होने की स्थिति को देखते हुए शीतगृहों के संचालन की अवधि 30 नवंबर से आगे बढ़ाई भी जा सकती है।