बगैर कनेक्शन रसोई गैस उपयोग करने वालाें की किताब बनाई जाएगी। यानी जो
उपभोक्ता बड़ा रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी किताब नहीं
बनी है, इनके लिए राहत भरी खबर है। यानी उपभोक्ता एजेंसी पर जाकर संपर्क
करके वैध गैस कनेक्शन धारक बन सकते हैं।
जिले में करीब 15 फीसदी
उपभोक्ता ऐसे हैं, जो बगैर कनेक्शन लिए रसोई गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इनके पार्स गैस सिलेंडर है लेकिन किताबें नहीं बनी हैं। यह लोग वह हैं,
जिन्होंने कनेक्शन लेने के बजाए रसोईगैस सिलेंडर, रेगुलेटर और चूल्हा खरीद
लिया और काम चलाने लगे। यह लोग ब्लैक में रसोई गैस खरीदते हैं। इसी के चलते
गैस की कालाबाजारी बढ़ती है।
इस कालाबाजारी को रोकने के लिए गैस
कंपनियों ने नया कदम उठाते हुए ऐसे उपभोक्ताओं की किताबें बनाए जाने का
निर्णय लिया है। इसके लिए गैस एजेंसियों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए
हैं। बगैर किताब के रसोईगैस का प्रयोग करने वाले उपभोक्ता संबंधित एजेंसी
पर जाकर अपनी किताब बनवा सकते हैं। गैस किताब बनने यानी वैध कनेक्शनधारक
बनने के बाद इन उपभोक्ताओं को पहल योजना का लाभ भी दिया जाएगा।
वर्जन
जिन
उपभोक्ताओं के पास बड़ा रसोई गैस सिलेंडर और रेगुलेटर है वे संबंधित गैस
एजेंसी पर जाकर किताब बनवा सकते हैं। इसके दिशा-निर्देश जिले की सभी गैस
एजेंसियों को दे दिए गए हैं। गैस एजेंसी संचालक ऐसे उपभोक्ताओं की किताब
प्राथमिकता के आधार पर बनाएंगे।
इससे गैस की कालाबाजारी भी रुकेगी।
किताब बनने के बाद उपभोक्ता को पहल योजना का भी लाभ दिया जाएगा। किताब
बनवाने वाले उपभोक्ता को जमानत प्रतिभूति धनराशि के तहत 1450 रुपये, 150
रुपये रेगुलेटर चार्ज और 50 रुपये किताब के गैस एजेंसी पर जमा करने होंगे।
इसके बाद उपभोक्ता को गैस कनेक्शन नंबर जारी कर दिया जाएगा।
गौरव गर्ग, नोडल अधिकारी, फर्रुखाबाद पहल योजना