ईद-उल-जुहा (बकरीद) की तैयारियां पूरी हो गई है। मंगलवार को बकरीद धूमधाम से मनाया जायेगा।
शहर व देहात की ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज की तैयारियां कर ली गई हैं। मुस्लिम घरों में गजब का उत्साह है। मौलाना मुख्तार आलम कादरी बताते हैं कि अल्लाह ने अपने नेक बंदे हजरत इब्राहिम से सबसे चहेती चीज कुर्बानी मांगी थी। इस आजमाइश में खरा उतरने के लिए उन्होंने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माईल को कुर्बानी के लिए पेश कर दिया।
लेकिन अल्लाह ने बेटे की जान नहीं ली, बल्कि अपने पैगंबर का इम्तिहान लिया था, जिस वजह से अल्लाह की दुआ पर पुत्र को बचा लिया गया और हलाल जानवरों की कुर्बानी हमेशा के लिए कायम कर दी गई। पैगंबर इस्लाम ने कुर्बानी देने की तामीद की है। मोहम्मद शमीम खां कहते हैं कि बकरीद के मौके पर लोग अपनी मेहनत की कमीई से मक्का में फरीज-ए-हज अदा करने पहुंचते हैं।
सदियों पहले मक्का में हजरत इब्राहिम व उनके बेटे हजरत इस्माईल ने खान-ए-काबा की तामीर की थी, जिसे अल्लाह के घर का दर्जा प्राप्त है। हज मालदारों पर फर्ज है। उधर, बकरीद की नमाज के लिए नई व पुरानी ईदगाहों में विशेष तैयारी की गई है।
पुरानी ईदगाह कमेटी के सदस्य हाजी मुजफ्फर हुसैन रहमानी ने बताया कि लोग नमाज के लिए समय से पहले पहुंचें। हाजी वारिस अली कहते हैं कि बुराइयों का त्याग करना सबसे बड़ी कुर्बानी है।