एआरटीओ कार्यालय से बस माफिया विमल चतुर्वेदी की सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई सोलह बसों की फाइलें गायब हो जाने के मामले की जांच करने दरोगा सोमवार को पहुुंचीं। महिला दरोगा व फोर्स को देखकर कार्यालय में भगदड़ मच गई।
कार्यालय के अंदर काम कर रहे बाहरी लोग वहां से भाग निकले। दरोगा ने प्रधान लिपिक से कार्यालय के स्टाफ, चौकीदार, चपरासी के बारे में पूछा। साथ ही जानकारी की कि फाइलें कहां रखी जाती हैं। लिपिक ने कोई जवाब नहीं दिया। एआरटीओ प्रभारी मंत्री की बैठक में गए थे। ऐसे में दरोगा वहां से नक्शा बनाकर वापस आ गईं।
एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय ने शनिवार शाम को फतेहगढ़ कोतवाली में अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्यालय से विमल चतुर्वेदी की सोलह बसों की फाइलें चुराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। इसकी विवेचना दरोगा सीमा पटेल को मिली है। सोमवार को दरोगा फोर्स के साथ एआरटीओ कार्यालय में मुकदमे की जांच करने पहुंचीं।
उनके साथ में फोर्स को देखकर कार्यालय में अफरा तफरी मच गई। लिपिकों की सीटों पर काम कर रहे बाहरी लोग पुलिस को देखकर भाग निकले। दरोगा ने आरआई जीवन कुमार से बातचीत की। आरआई ने बताया कि एआरटीओ प्रभारी मंत्री की बैठक में कलक्ट्रेट गए हैं। इस पर दरोगा ने प्रधान लिपिक भीम बाबू को बुलाकर पूछताछ की।
उन्होंने ने लिपिक से पूछा कि रिकार्ड कहां रखा जाता है। रिकार्ड रखने के लिए कार्यालय में कौन सा स्थान है। रात में कार्यालय में कौन चौकीदार रहता है। दिन में रिकार्ड रखने और लाने के लिए किस चपरासी की ड्यूटी रहती है। यदि रिकार्ड पुराने कार्यालय में रखा था तो चाबी किसके पास रहती थी। क्या दलालों से फाइलें मंगवाई जाती थीं। दरोगा के कई सवाल सुनकर प्रधान लिपिक सकपका गए।
लिपिक भीम ने दरोगा को बताया कि एआरटीओ मीटिंग में गए हैं। उनके पास ही सारी जानकारी रहती है। इस पर दरोगा सीमा पटेल फोर्स के साथ लौट गईं। सीमा पटेल ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में अफसर मिले नहीं और कर्मचारियों ने विवेचना में सहयोग नहीं किया है। वह फिर से मौके पर जाएंगी और कर्मचारियों व अफसरों के बयान भी लेंगी।